Sunday, 21 June 2020

रगों मे देश प्रेम और दिलों में जोश रहता है,
ये हिंद का सिपाही है, ये मौत से कब डरता है...

#SwetaBarnwal

Wednesday, 10 June 2020

चन्द लम्हें...

यूँ अचानक किसी मोड़ पर, 
एक रोज़ उनसे टकरा गए, 
मिली जो नजरों से नज़र,
दिल में दफन अनकही बातेँ 
लबों पर आने लगी, 
कदम लड़खड़ाने लगे,
आंखें शर्माने लगी, 
हुआ कुछ ऐसा असर
ना वो रहे होश में 
और ना ही मुझको कोई खबर, 
चंद लम्हों मे जैसे 
सदियां गुज़र गई, 
ये जो लुढ़क कर 
दामन में हमारे 
वक़्त आ गया, 
गुज़रा हुआ कल 
पल में आज हो गया, 
उलझी हुई थी ज़िन्दगी, 
मिली जो उनसे 
तो गुलज़ार हो गई, 
ख़ुद से ही जैसे मैं 
बेज़ार हो गई, 
फ़िर से गुम ना हो जाए 
ये लम्हा कहीं, 
यही सोच हाथ बढ़ाया 
समेटने को इसे, 
अगले ही पल 
नींद टूटी और 
ख़ुद को तन्हा पाया, 
जो किस्मत में ही नहीं 
जाने वो कैसे सपनों में आया, 
झूठे ख्यालों से ही सही 
मेरे मन को हर्षाया... 


#SwetaBarnwal 

अमर प्रेम...

कोई नाता नहीं 
फ़िर भी खास है वो, 
लगता है जैसे 
हर पल पास है वो, 
अनजानी सी डोर है, 
खिंचे उसकी ओर है, 
इस जन्म का या फिर 
कई जन्मों का, 
पता नहीं ये
कैसा बंधन है, 
ना रस्मों रिवाज़ की 
बंदिश कोई, 
ना इस रिश्ते का 
कोई नाम है, 
ना मानो तो 
कुछ नहीं 
और मानो तो 
राधा कृष्ण का 
प्यार है, 
कुछ ऐसे भी 
रिश्ते होते हैं 
जो बिन रस्मों के 
बंध जाते हैं, 
ना जाने ऐसे रिश्ते 
दुनिया में क्या 
कहलाते हैं, 
ये दिल के 
रिश्ते होते हैं 
जो दिल ही दिल 
मे पलते हैं,
नाम ना दो 
कोई इसको, 
ये अमर प्रेम 
कहलाते हैं... 

#SwetaBarnwal 

रक्षक...

रोज की तरह आज फिर हम घर से निकले, 
दिल में फ़िर से वही अरमान लिए, 
सलामत रहे यह देश हमारा, 
चाहे फ़िर हम रहे ना रहे, 
सर पर बांधा है कफन हमने, 
हाथों में सजाये रखा है जान,
मौत आए तो कोई ग़म नहीं, 
रहे मुस्कराता देश हमारा ये कम नहीं, 
हम लड़ रहे यहां ताकि तुम सलामत रहो,
माना दुश्मन अनदेखा है, 
पर हौसला हमारा कम नहीं, 
कई रूप है हमारे, देश के प्रहरी है हम 
सड़क हो या अस्पताल हर जगह तैनात हम, 
कहीं डॉ के भेष मे तो कहीं सिपाही, 
कहीं सफाई कर्मचारी तो कहीं नर्स बन कर, 
कहीं भूखों का निवाला बन कर, 
कहीं गरीब और मजबूरों का सहारा बन कर, 
कहीं बन कर विज्ञान का हाथ 
भर रहे हैं ऊंची उड़ान, 
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तान... 

दिन रात डटे हैं हम इस जंग में, 
तुम रह सको बेखौफ घर में, 
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तान, 
हमने धर्म और मजहब की दीवारें नहीं देखी, 
हमने जात पात का मर्म ना जाना, 
बिना भेद भाव के सबकी सेवा की, 
किसी ने सराहा, किसी ने पलकों पे बिठाया, 
किसी ने थूका तो किसी ने तलवारें भी चलाई, 
किसी ने फूल बरसाये तो किसी ने पत्थर, 
हौसला हमारा तनिक ना डगमगाया, 
क्यूंकि हम हैं सिपाही हिंद-ए-वतन के, 
चाहे तुम सम्मान दो या खेलो हमारे प्राण से, 
खड़े रहेंगे हम शान से लड़ेंगे हम जी जान से, 
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तान... 

विपत्ति बड़ी है, सामने खड़ी है, 
हम लगातार लड रहे हैं और लड़ते रहेंगे, 
माना लड़ाई आसान ना होगी, 
जो दे दो तुम ज़रा सा साथ, 
कोई चुनौती इतनी बड़ी ना होगी, 
रहो तुम सुरक्षित घर के अंदर 
हम हैं तुम्हारी रक्षा के लिए हर पल तत्पर, 
जो कहते थे कभी साँस लेने की फुर्सत नहीं, 
आज वक़्त मिला है, जी भर कर जिओ, 
हमारी किस्मत में ना सही, तुम्हें तो मिला है, 
ये परिवार ही तो है जो नसीब वालों को मिला है, 
अपना हर फ़र्ज़ हम निभाएंगे, 
देश को इस बिमारी से बचाएंगे 
ताकि जीता रहे अपना हिन्दुस्तान... 


#SwetaBarnwal 

Wednesday, 13 May 2020

Corona warriors...

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

माना विपदा बड़ी है, 
सामने मौत खड़ी है, 
हर ओर सन्नाटा फैला है, 
सब घर में दुबके पड़े हैं, 
और तुम बाहर सड़कों पर खड़े हो, 
ताकि सुरक्षित रह सके ये देश हमारा, 
परिवारों से दूर अपने, 
मिलने को भी तरसते रहे, 
सरहद हो या पार सात समंदर, 
या हो कोई शैतान देश के अंदर, 
भारत माँ के प्रहरी तुम, 
हर दुश्मन से ही लड़ते हो, 
हर फर्ज़ को अंजाम देते हो, 
देश रक्षा के ख़ातिर मौत से भी लड जाते हो, 

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

हम रहें सुरक्षित घर में अपने, 
तुम दिन रात परिश्रम करते हो, 
तभी तो शायद कहते हैं, 
तुमको विधाता का स्वरुप, 
Corona एक महामारी है, 
जानते हैं ये हम सभी, 
छूने से भी फैलती है, 
हो सकती है तुमको भी ये बीमारी, 
फ़िर भी तुमने हार ना मानी, 
दूर इसे भगाने की तुमने है मन में ठानी, 

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

गंदगी से भी यह फैलेगी, 
नहीं किसी को ये छोड़ेगी, 
मित्र नहीं, ना सखा किसी की, 
ये बीमारी सबको ले डूबेगी, 
फ़िर भी तुम डटे रहे, 
सबका कचरा साफ़ करते रहे, 
अड़े रहे तुम अपने पथ पर, 
अपना कर्म करते रहे, 
रहें हम सलामत और देश सलामत, 
तुम साफ़ सफ़ाई करते रहे, 

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

चिकित्सा मे माना हम बहुत पीछे थे, 
संसाधनों की कमी बड़ी थी, 
वक़्त था बहुत कम और लड़ाई बड़ी थी, 
नेता है हमारा सक्षम, 
उसके सामने टिक जाए भला 
Corona मे कहाँ दम, 
तुरंत कठोर फैसले लिए, 
सरहदों को सील किया 
देश को एकजुट किया, 
PPE kit, ventilator, robots, hydroxochloroquine, 
बड़े कम समय में सबका उत्पाद कराया, 
विज्ञान, चिकित्सा और प्रौद्योगिकी ने 
मिल कर नया इतिहास रचाया, 

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

Lock-down मे जब सारा देश थम सा गया, 
तब भी तुम रुकी नहीं, 
सुस्ता रहें हैं जहां सब लोग घर में, 
तुम फ़िर भी थकी नहीं, 
सब के लिए होगी ये लंबी छुट्टी, 
पर तुम आज भी लगी हुई हो, 
कभी रसोई में, तो कभी बच्चों के देखभाल मे, 
कभी बाहर से आए सामान को धोने मे, 
कभी सबके कपड़ों की धुलाई, 
कभी घर की साफ़ सफ़ाई, 
एक छींक आ जाए किसी को, 
तुम्हारी जान निकल जाती है, 
लेकर काढ़ा और दवाई सेवा में लग जाती है, 
धन्य है घर की नारी, 
तेरे बिना अधूरी है हर लड़ाई और हर तैयारी, 
कोई माने या ना माने 
पर इस जंग में तूने भी है अहम भूमिका निभाई, 

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

हर मुश्किल मे तुम सब डटे रहे, 
कोई तुझपर थूक रहा है 
तो कहीं तुझ पर पत्थरबाजी हुई, 
कोई नंगा नाच दिखा रहा है, 
तो कहीं तेरे साथ अश्लील हरकतें हुई, 
किसी ने हाथ काट डाले, 
किसी ने तुझपर तलवारों से वार किया, 
Corona के साथ साथ तू 
इन जुल्मों का भी शिकार हुआ, 
पर फ़िर भी तुम रुके नहीं झुके नहीं, 
ये जंग अभी भी जारी है, 
अपनी पूरी तैयारी है, 
ऐ Corona तुझको अब जाना होगा, 
हम सबने मिल कर ये ठानी है.

ऐ Corona warriors...! 
तुम्हें है नमन हमारा... 

#SwetaBarnwal 


माँ के प्यार की दौलत...

लाख हो भूखी माँ,
फ़िर भी कभी थकती नहीं,
देकर अपने मुह का निवाला 
सन्तान को पालती है माँ, 
सर्वस्व लुटा कर भी अपना,
आह नहीं भरती है माँ,
जाने क्यूँ उस माँ के आँखों से 
आंसू आज थमते नहीं, 
ख़ुद सो जाती है गीले मे,
सन्तान को हर मुश्किल से बचाती है माँ, 
हर लम्हे को वो खास बना देती है, 
अपनी ज़िंदगी का हर एहसास जिसके नाम कर देती है, 
क्यूँ दो पल का भी वक़्त नहीं दे पाता है वो, 
जब वृद्धावस्था में पहुंच जाती है माँ, 
चार चार संतानो को अकेले पाल लेती है माँ, 
फ़िर भी बुढ़ापे मे चार रोटी को तरस जाती है माँ, 
अरे किस्मत भी हार मान जाती है जब, 
माँ की दुआ एक नया रंग लाती है तब, 
माँ ज़मी पर जन्नत का एहसास है,
बच्चों के लिए जैसे वो खुला आकाश है, 
लौट जाती है हर बलाएँ टकरा कर,
सामना जो कभी माँ की दुआओं से होता है, 
थक कर सो जाती है रातें भी अक्सर,
माँ ने तो इन्तजार मे सदियाँ गुज़ारी है, 
मत देना कभी कोई कष्ट उस माँ को, 
जिसने तेरे लिए प्रसव का अनकहा दर्द झेला है, 
रखा है नौ महीने तुझको कोख में, 
जो तेरे इस दुनिया में आने की वज़ह बनी है, 
कई मन्नतें मांगी है उसने तेरे लिए, 
कई रातें गुज़ारी है जागती आंखों से उसने, 
लाख रही बिमार फ़िर भी, 
तेरे लिए किए हैं कई व्रत उसने, 
कितने ही चौखटों पे अपना सर है पटका,
तेरे लिए ख़ुद विधाता से भी लड गई माँ, 
उसे किसी और प्यार की जरूरत नहीं, 
जिसे माँ के प्यार की दौलत मिल गई... 

#SwetaBarnwal 

Sunday, 3 May 2020

भारत माँ के चरणों में मैं नित शीश नवाया करती हूँ,
वीर शहीदों की गाथाओं को मैं रोज दुहराया करती हूँ...

#SwetaBarnwal


ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...