Wednesday, 31 January 2018

*तेरा-मेरा रिश्ता *

*तेरा-मेरा रिश्ता *


मुड़कर देखती हूँ 
तो अक्सर ये सोचती हूँ, 
कितने अलग हैं 
हमारे किस्से, 
तू साथ है 
तो है ये ज़िंदगी, 
कभी गम आया ही नहीं 
हमारे हिस्से... 

अकेली कहाँ थी मैं
कितनी नादान थी, 
खुद को अक्सर 
तन्हा समझती रही, 
अपने रिश्ते को बस 
नाम देती रही, 
तुझे हर गम भुलाने का 
काम देती रही... 

तू मोहब्बत है
दोस्त है, ख़ुदा है, 
तेरा-मेरा रिश्ता 
सबसे ज़ुदा है, 
मैं तो आई थी 
तुझसे अपनी रिहाई मांगने, 
तूने मुझे रोक लिया
दे दिया सबकुछ बिना मांगे.... 

#SwetaBarnwal 

*अच्छा लगा *

*अच्छा लगा *

ना सोचा था किसी से दिल लगाने की कभी,
पर आपका दिल से दिल मिलाना अच्छा लगा...
झूठे होते हैं ये प्यार के वादे करने वाले,
पर आपका ये निश्छल प्रेम अच्छा लगा...

साथ जीने मरने की कसमें खा कर,
सात कदम भी साथ नहीं चल पाते हैं लोग,
पर यूँ बिन किसी वादे के सारी ज़िंदगी, 
आपका साथ निभाना अच्छा लगा...

बन जाता कोई ना कोई हमसफ़र,
हमारे इस ज़िंदगी के सफर का,
पर एक अनजाने मोड़ पर आपका मिलना,
और यूँ ताउम्र साथ चलना अच्छा लगा...

#SwetaBarnwal
(dedicated to my loving husband) 

"अच्छा लगता है "

"अच्छा लगता है "

तेरी बातें अच्छी लगती है, 
तेरी चाहत सच्ची लगती है
तू यार है मेरा,
ये ख्याल अच्छा लगता है,
मैं तुझको चाहूँ बेइन्तेहाँ
तू भी मुझको ही चाहे, ये सोच के अच्छा लगता है...
तुझसे है मेरा जन्मों का नाता,
तेरा साथ मुझको सबसे अच्छा लगता है...
बहुत खूबसूरत लगने लगी है ये ज़िन्दगी,
तेरी हर बात मुझको सच्ची लगती है...
तेरे साथ चलने को तैयार हूँ मैं फ़लक तक,
तेरा साथ होना मुझे अच्छा लगता है...
तेरे खातिर जान भी दे दूँ मैं अपनी,
पर तेरे संग जीना अच्छा लगता है...
यूँ तो तन्हा भी कट जाती ये ज़िन्दगी,
पर तेरा पास होना अच्छा लगता है...

#SwetaBarnwal 

"हद कर दिया"

"हद कर दिया" 

वाह रे जमाना तूने तो हद कर दिया,
ससुराल के आगे मायके को रद कर दिया...

बड़ी नाज़ों से जिसने पाला-पोसा,
आज एक झलक को उसे मोहताज़ कर दिया,
कल के छोकरे को सर का ताज कर दिया,
पति को परमेश्वर और पिता को पराया कर दिया... 

वाह रे जमाना तूने तो हद कर दिया,
ससुराल के आगे मायके को रद कर दिया...

पिता लाचार बेबस बिस्तर पर पड़ा, 
बेटी को देखने को उसका दिल है अड़ा, 
बड़ी विनती की तब बिटिया ने तुझसे, 
पराया होने का तूने उसे अहसास कराया, 
ससुराल और ससुराल वाले ही अब तेरे अपने हैं, 
उसको ये फरमान सुनाया, 
रोती गिड़गिड़ाती रह गई बेटी तुझको तरस ना आया... 

वाह रे जमाना तूने तो हद कर दिया,
ससुराल के आगे मायके को रद कर दिया...

जिसकी कोख में पली वो, 
पल में उसी से बेगाना कर दिया, 
होली, दशहरा, दिवाली सब मे,
तूने उसको रुसवा कर दिया,
वो यादें अतीत की वो मोहब्बत माँ-बाप की,
सबको तूने उसकी ज़िन्दगी से रद कर दिया...

वाह रे जमाना तूने तो हद कर दिया,
ससुराल के आगे मायके को रद कर दिया...

#SwetaBarnwal 
चेहरे पर लगे कई चेहरे हैं यहाँ,
हर चेहरे पे सौ-सौ पहरे हैं यहाँ...
दिल पे लगे घाव गहरे हैं यहाँ,
फिर भी सबके बीच मुस्कुरा के हम ठहरे हैं यहाँ... 

#SwetaBarnwal

Saturday, 27 January 2018

कैसी है ये मोहब्बत,
कैसी है ये उल्फत, 
दिलबर साथ हो तो,
जुदाई का डर सताए,
और दूर हो जाए तो,
बेवफ़ाई का गम सताए...

#SwetaBarnwal 
इस कदर वो रूठे एक रोज, 
कि फिर हमसे मनाया ना गया,
आज ख़ुद चल कर आए हैं वो पास
फिर भी उनसे दिल लगाया ना गया...

#SwetaBarnwal 

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...