*तेरा-मेरा रिश्ता *
मुड़कर देखती हूँ
तो अक्सर ये सोचती हूँ,
कितने अलग हैं
हमारे किस्से,
तू साथ है
तो है ये ज़िंदगी,
कभी गम आया ही नहीं
हमारे हिस्से...
अकेली कहाँ थी मैं
कितनी नादान थी,
खुद को अक्सर
तन्हा समझती रही,
अपने रिश्ते को बस
नाम देती रही,
तुझे हर गम भुलाने का
काम देती रही...
तू मोहब्बत है
दोस्त है, ख़ुदा है,
तेरा-मेरा रिश्ता
सबसे ज़ुदा है,
मैं तो आई थी
तुझसे अपनी रिहाई मांगने,
तूने मुझे रोक लिया
दे दिया सबकुछ बिना मांगे....
#SwetaBarnwal
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