Monday, 8 January 2018

फलसफा ज़िन्दगी का

कुछ इस कदर मुस्कुरा रही थी ज़िंदगी मेरी,
ना होश था ज़माने का, ना डर था कुछ खो जाने का,
यूँ अचानक मुसीबतों ने आ कर डेरा डाल दिया,
अंदर तक मुझको हिला दिया...

सीख अधूरी ही थी ज़िंदगी की,
और इम्तेहानों का सिलसिला शुरू हो गया,
ना संभलती तो बिखर जाती,
इस तरह मेरी ज़िन्दगी का सफर शुरू हो गया...

ना देखा गया ज़माने से ये हौसला हमारा,
हर कदम पे काँटे बिछाता गया,
बदल दिया हमने भी अपना नज़रिया,
आँखों पे पड़ा उम्मीदों का पर्दा गिरा दिया...

मुश्किलों से लड़ती रही, गिर कर उठती रही,
बिखरते अरमानों को समेटा हमने,
ज़िन्दगी मे नया मकाम पा लिया,
कामयाबी का हमने भी परचम लहरा दिया....

सहन ना हुई मेरी कामयाबी उनसे,
हर बार राह मे रोड़े लगा दिए,
गिराते रहे मेरे अपने ही मुझे हर बार,
हर बार गिरते ही मैंने हौसला बढ़ा लिया...

शुक्रिया मेरे उन चाहने वालों का,
मुझे हराने की कोशिशें जिनकी,
मुश्किलों से मुझको लड़ना सीखा दिया,
#श्वेता को ज़िन्दगी जीना सीखा दिया....

#SwetaBarnwal

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