Wednesday, 10 January 2018

काश...!

काश...!  कोई ऐसी कलम मिल जाए, 
जिससे हम अहसासों को भी बयां कर पायें... 
काश...! कोई ऐसा रंग मिल जाए,
जिससे हम दिल के भावों को भी दर्शा पाएं... 
काश...! मिल जाए वो गज़ल, 
जिसमे दुनिया भर के दर्द सिमट जाए... 
काश...! मिल जाए वो अल्फाज़, 
जिससे मिट जाए दुनिया के रंज-ओ-गम... 
काश...! मिल जाए वो तलवार #श्वेता, 
गिर जाए जिससे दिल-ओ-दिवार... 
काश...! मिल जाए मुझको वो दुआ, 
बन जाए जो हर इक मर्ज़  की दवा... 


#SwetaBarnwal 

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