ये बस्ती है मोहब्बत करने वालों की,
यहां सवेरा सूरज के निकलने से नहीं दीदार-ए-यार से होता है....
#SwetaBarnwal
यहां सवेरा सूरज के निकलने से नहीं दीदार-ए-यार से होता है....
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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