Monday, 1 January 2018

ये बस्ती है मोहब्बत करने वालों की, 
यहां सवेरा सूरज के निकलने से नहीं दीदार-ए-यार से होता है....

#SwetaBarnwal 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...