Wednesday, 12 June 2019

नन्ही सी कली...

अपने बाबुल के बगिया की नन्ही सी कली थी वो
माँ बाबा के दिल का टुकड़ा बड़े ही नाज़ों से पली थी वो
उसकी मासूम सी हंसी देख पत्थर भी पिघल जाता था
देख कर उसकी प्यारी सी अटखेलियाँ
घर वालों का दिन संवर जाता था
अचानक आया एक दिन तूफ़ान कुछ ऐसा
ना बची कोई ख़ुशी ना रहा कुछ पहले जैसा
ना जाने कहाँ से उनके जीवन में आया एक शैतान
उड़ा ले गया वो हर बाप के दिल का सुकून
देख कर जिसकी भोली सूरत प्यार आता था सबको
उसी मासूम पे किसी ने अपनी हैवानियत उतारी
कितना रोई होगी वो किस दर्द से गुज़री होगी
देख कर जिसको इंसानियत भी सकुचाई होगी
सोचो एक बार जरा उसकी माँ कैसे सोई होगी
रूह तक कांप उठती है जब चेहरा उसका सामने आता है
ऐ जालिमों उस नन्ही सी बच्ची मे तुम्हें क्या नज़र आता है
छोटे कपड़ों में देख उसे काम वासना मचलती है जिसकी
तुम्हीं बता दो एक नन्हीं सी जान को माँ साड़ी पहनाती कैसे
क्यूँ नहीं तुम अपनी नज़रों पे एक पर्दा डाल लेते हो
छुप जाएगी जिस दिन तुम्हारी वहसी नज़रें
मुस्कुरा कर जी उठेंगी ये नन्ही सी कली
एक नारी की ही कोख से जन्म लेकर
नारी की अस्मिता को कलंकित करने वाले
अगर अब भी तुम ना सुधरे तो एक दिन ऐसा आएगा
धरा पर मर्द को जन्म देने से पहले भगवान भी घबराएगा.
😢😢😢

#SwetaBarnwal

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