Sunday, 16 June 2019

क्यूँ अक्सर अपनों के हाथों ही छले जाते हैं हम
क्यूँ हर बार बेटी होने की सज़ा पाते हैं हम... 😢

#SwetaBarnwal

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...