क्यूँ अक्सर अपनों के हाथों ही छले जाते हैं हम
क्यूँ हर बार बेटी होने की सज़ा पाते हैं हम... 😢
#SwetaBarnwal
क्यूँ हर बार बेटी होने की सज़ा पाते हैं हम... 😢
#SwetaBarnwal
ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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