ओ बेटी सुन लो मेरी बात आज
नही लेना किसी से कुछ भी
चाहे दे कोई चॉकलेट या खिलौना
हो कोई दूर का या फिर अपना
भले ही तू उम्र में छोटी है
पर सीख ले करना फ़र्क
अपनों मे और अपनेपन मे
हर कोई आएगा तेरा अपना बन के
और छिन जाएगा तुझसे हर ख़ुशी
गर कभी हो घर में अकेले
मत खोलना दरवाज़ा किसी के लिए
ना जाने किस वेश में आ जाए शैतान
बिना चाकू लिए कहीं मत जाना
जरूरत पड़े तो उसे चलाना तु
जालिमों की कमी नहीं है संसार में
जाने कब किस मोड़ पर मिल जाए
गलती तेरी हो या किसी और की
कलंक तुझ पर ही लगाएंगे
अनचाहे सवालों से तुझको
दुबारा उसी दर्द का अहसास कराएंगे
क्यूँ घर से अकेली निकली थी
आधी रात कहाँ मुह काला कर रही थी
छोटे कपड़े पहनोगी तो ऐसा होगा ही
लड़कों के साथ दोस्ती थी इसकी
क्या संस्कार दिए थे माँ बाप ने
ऐसी लड़कियों के साथ ऐसा ही होता है
कहाँ से लाओगी जवाब इनका
बेकसूर होते हुए भी गुनाहगार कहलाओगी
आख़िर किस किस को समझाओगी
तुम कितनी बार अग्नि परीक्षा दोगी
सीता माता तो धरती की गोद में समा गई थी
तेरे लिए तो धरती का सीना भी नहीं फटेगा
अब तुझे नहीं डरना होगा अब तुझे नहीं रुकना होगा
अपने स्वाभिमान के लिए दुनिया से लड़ना होगा
अकेले ही तुझको चलना होगा सबको समझाना होगा
बंद करो बेटियों पर पाबंदी लगाना
अब बेटों पर भी लगाम लगाना होगा
आख़िर कब तलक लुटती रहेंगी बेटियाँ
और ये समाज पर्दे डालता रहेगा बेटों के अपराधों पर
अब तो सबको जागना होगा
इस कुरीति को दूर भगाना होगा
कहीं ऐसा ना हो जन्म लेने से इंकार कर दे बेटियाँ
या इंकार कर दे अपनी कोख में रखने से बेटों को...
#SwetaBarnwal
नही लेना किसी से कुछ भी
चाहे दे कोई चॉकलेट या खिलौना
हो कोई दूर का या फिर अपना
भले ही तू उम्र में छोटी है
पर सीख ले करना फ़र्क
अपनों मे और अपनेपन मे
हर कोई आएगा तेरा अपना बन के
और छिन जाएगा तुझसे हर ख़ुशी
गर कभी हो घर में अकेले
मत खोलना दरवाज़ा किसी के लिए
ना जाने किस वेश में आ जाए शैतान
बिना चाकू लिए कहीं मत जाना
जरूरत पड़े तो उसे चलाना तु
जालिमों की कमी नहीं है संसार में
जाने कब किस मोड़ पर मिल जाए
गलती तेरी हो या किसी और की
कलंक तुझ पर ही लगाएंगे
अनचाहे सवालों से तुझको
दुबारा उसी दर्द का अहसास कराएंगे
क्यूँ घर से अकेली निकली थी
आधी रात कहाँ मुह काला कर रही थी
छोटे कपड़े पहनोगी तो ऐसा होगा ही
लड़कों के साथ दोस्ती थी इसकी
क्या संस्कार दिए थे माँ बाप ने
ऐसी लड़कियों के साथ ऐसा ही होता है
कहाँ से लाओगी जवाब इनका
बेकसूर होते हुए भी गुनाहगार कहलाओगी
आख़िर किस किस को समझाओगी
तुम कितनी बार अग्नि परीक्षा दोगी
सीता माता तो धरती की गोद में समा गई थी
तेरे लिए तो धरती का सीना भी नहीं फटेगा
अब तुझे नहीं डरना होगा अब तुझे नहीं रुकना होगा
अपने स्वाभिमान के लिए दुनिया से लड़ना होगा
अकेले ही तुझको चलना होगा सबको समझाना होगा
बंद करो बेटियों पर पाबंदी लगाना
अब बेटों पर भी लगाम लगाना होगा
आख़िर कब तलक लुटती रहेंगी बेटियाँ
और ये समाज पर्दे डालता रहेगा बेटों के अपराधों पर
अब तो सबको जागना होगा
इस कुरीति को दूर भगाना होगा
कहीं ऐसा ना हो जन्म लेने से इंकार कर दे बेटियाँ
या इंकार कर दे अपनी कोख में रखने से बेटों को...
#SwetaBarnwal
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