Monday, 22 October 2018

नामुमकिन सा यारा हमने भी एक ख्वाब देखा है,
ख्वाब में उनको अपने बिलकुल पास देखा है,
पल भर की भी फ़ुर्सत नहीं जिनके पास हमारे लिए,
ख्वाब में ही सही हमने उन्हें अपना इंतज़ार करते देखा है...

#SwetaBarnwal

Friday, 19 October 2018

जी चाहता है...

जी चाहता है आज कुछ बयां करूं,
जो दिल में है मेरे उसका ऐलान करूं,
तुझसे है मोहब्बत ये जानते हैं हम,
आज ये इज़हार मैं सरे आम करूं,
ख्वाबों में तो तुम हर रोज मिलते हो,
हकीकत जो हो जाए वो अल्फाज़ लिखूं,
हर पल जो छाया रहता है मुझपे नशा सा,
दिल की हर धड़कन मैं तेरे नाम लिखूं,
ख्यालों में जो हर वक़्त एहसास होता है,
जी चाहता है उसे लफ़्ज़ों में बयां करूं,
जिस्म हूँ मैं तेरी और मेरी जान हो तुम,
सारी ज़िंदगी आज मैं बस तेरे नाम लिखूं...

#SwetaBarnwal






भागम भाग...

हम भी भाग रहे हैं  तुम भी भाग रहे हो, 
हर आदमी यहां देखो ख़ुद से भाग रहा है,
कोई यहां पैसे के पीछे भाग रहा है
तो कोई शोहरत के पीछे भाग रहा है
कोई यादों से भाग रहा है तो कोई वादों से,
कोई बातों से भाग रहा है तो कोई इरादों से,
कोई सच से भाग रहा है तो कोई झूठ से,
कोई ज़िंदगी से भाग रहा है तो कोई मौत से,
कोई अपनों से भाग रहा है तो कोई अपने आप से,
ना जाने कैसी ये प्यास है किससे लगाया सबने रेस है,
पर इतना तो तय है कि यहां सब भाग रहे हैं,
आगे बढ़ने की चाह में ख़ुद से पीछे रह गए हैं,
ना जाने हम सब क्या से क्या हो गए हैं...

#SwetaBarnwal 

Wednesday, 17 October 2018

अब हम पहले की तरह रोज़ नहीं करते हैं उनसे बात,
ख़्याल आते ही उनका उमड़ पड़ते हैं हमारे जज़्बात,
उन्हें तो कभी फ़र्क नहीं पड़ता रत्ती भर भी,
और धराशाई हो कर रह जाते हैं हमारे सारे एहसासात...

#SwetaBarnwal

Tuesday, 16 October 2018

एक मायूसी...😢

अपनी बंजर पड़ी ज़िंदगी को संवारते रही,
जो टूट गया साख से उसको फ़िर जोड़ती रही,

सारी ज़िंदगी निकल गई अपनी कश्मकश में,
रात हुआ तो आँसुओं से तकिये को भिगोते रही,

दफ्न कर दिया अपनी ख्वाहिशों को कब्र में,
फ़िर ताउम्र उस कब्र को मैं खोदती रही,

दर्द का बवंडर ले उड़ा मेरी खुशियों को,
गुब्बार की भांति हर पल मैं फ़िर भटकती रही,

कितने प्यार से यादों को तेरी संजोया था मैंने,
अब उन यादों की आग में खुद को जलाती रही,

बाकी बची है कुछ ही साँसें अपनी उधार की,
मौत से पहले कई बार ख़ुद को मैं मारती रही,

किसी की बद्दुआ थी या थी कोई मेरी ही ख़ता,
मैं जितना सुलझाती रही ज़िन्दगी उलझती रही,

अब अपने होने का एहसास भी ख़त्म होने लगा,
गुमनामी के अंधेरे मे यूं जैसे मैं गुम होती रही...


#SwetaBarnwal




Monday, 15 October 2018

चाहती हूँ बस...

चाहती हूँ बस मैं तेरे दिल में मेरा ही डेरा हो,
हर पल हर शय बस तू मेरी ही यादों से घिरा हो,

गर तू चाँद है तो तेरी चांदनी सिर्फ़ मुझपे बरसे,
गर तू सूरज है तो तेरी हर धूप सिर्फ़ मुझपे खिले,

चाहती हूँ बस तारों भरी रात हो और तु मेरे साथ हो,
हर पल तू मुझे निहारे, तेरी आँखों में मेरे ही ख्वाब हो,

चाहती हूँ तेरी किस्मत मैं संवारना तुझे दिल में बसाना,
तेरे हाथों में मोहब्बत की लकीरों में नाम सिर्फ़ मेरा हो,

चाहती हूँ बस तेरे साथ मेरी ज़िंदगी की हर शाम गुज़रे,
हर लम्हा हर आरज़ू तेरी ज़िंदगी का कुर्बान बस मुझपे हो,

मैं फूल बन खिलती रहूँ तुम खुशबु बन महकते रहो,
चाहती हूँ बस हर जनम तुम मेरे ही दामन से उलझते रहो,

तेरी हर सुबह मुझसे हो तेरी हर शाम मुझपे ही ढले,
चाहती हूँ बस तेरी ज़िंदगी सिर्फ़ मेरी पनाहों में ही गुज़रे ...

#SwetaBarnwal







तुम...

जब से हिस्सा बन गए हो तुम
मेरे अफसाने का,
एक मज़ा सा आ गया है
मेरे जीने मे,
अल्फाज़ों को अब हम
जोड़ने लगे,
तेरे मोहब्बत के गीत हम
गुनगुनाने लगे,
हर वक़्त यूँ तुम मुझ मे
समाए से रहते हो,
एक नशा सा जैसे मुझपर
छाया सा रहता है,
जो कभी दुहरा ना सकूँ
वो गीत बन गए हो,
मेरे इस मन के तुम जैसे
मीत बन गए हो,
जीवन बगिया के सुमधुर
संगीत बन गए हो,
जो कभी ना जुदा हो पाए
वो जान बन गए हो ...

#SwetaBarnwal






ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...