Wednesday, 20 November 2019

लड़ाई...

आखिर किस बात की है लड़ाई,
किसी को कोई खबर नहीं,
फिर भी लड़ सभी रहे हैं यहां,
कोई ख़ुद से लड़ रहा है,
कोई ख़ुद के लिए लड़ रहा है,
कोई अपने लिए कोई अपनों के लिए
और कोई अपने आप से लड़ रहा है,
कोई अपने वजूद के लिए लड़ रहा है,
कोई अपने रोग से लड़ रहा है,
कोई अपनी सोच से लड़ रहा है,
कोई बंदिशों से लड़ रहा है,
कोई कुत्सित विचारों से लड़ रहा है,
कोई देश के लिए लड़ रहा है,
कोई देश के अंदर लड़ रहा है
कोई सरहद पर लड़ रहा है,
कोई पहचान बनाने के लिए लड़ रहा है,
कोई हाथ से लड़ रहा है,
तो कोई हथियार से लड़ रहा है,
कोई अपनी ज़िन्दगी से लड़ रहा है,
तो कोई मौत से लड़ रहा है,
किसी को कोई खबर नहीं,
फिर भी लड़ सभी रहे हैं यहां,


#SwetaBarnwal


Tuesday, 19 November 2019

अधूरी कविता...

वो अक़्सर हमसे कहते हैं
बड़ा दर्द झलकता है
तुम्हारी कविता में,
लगता है बड़ा अधूरा सा,
कुछ खाली खाली सा,
कुछ सूना सूना सा
कुछ दबा दबा सा,
कुछ अनकहा अनसुना सा,

सच ही तो कहा है
झलकता है उसमे मेरा वजूद,
कुछ अधूरी सी मुस्कुराहट,
कुछ खोखली सी हंसी,
कई अधूरे से ख्वाब,
कहीं टूटे हुए जज़्बात,
तकिए में गुम हुए आंसुओं की धार
चादर में लिपटी हुई ख़ामोश सिसकियां,
कुछ अनकहे एहसासों के पुलिंदे
कुछ बिखरे बिखरे से हालात,

गर ज़िन्दगी कहानियों सी खूबसरत होती,
तो शायद ही काविताओं में किसी की रुचि होती...

#SwetaBarnwal


Monday, 18 November 2019

मेरे अधूरे सपने...

इन आंखों ने भी सजाए थे कई सपने,
कुछ पूरे हुए तो कुछ टूट गए
कुछ बेवजह ही मुझसे रूठ गए,
कुछ जीने नहीं देते और कुछ मरने नहीं देते,
मेरे अधूरे सपने...
कुछ अश्कों में बह कर चले गए,
कुछ भोर होते ही निकल लिए,
कुछ सांसों के साथ जुड़े बैठे हैं,
कुछ से जंग अभी भी जारी है,
मेरे अधूरे सपने...
अधूरे सपनों पे मैंने अपनी इमारत खड़ी की है,
भाग दौड़ की ज़िन्दगी में वक़्त से रेस लगाई है,
हार हमने भी मानी नहीं, ज़िद हमने छोड़ी नहीं,
जब तक सांस है आस की डोर हमने तोड़ी नहीं
मेरे अधूरे सपने...
कुछ बालपन में देखे थे,
कुछ जीवन पग पे सजाए थे,
कुछ याद हमेशा आते हैं,
कुछ भूले नहीं भुलाए जाते हैं,
मेरे अधूरे सपने...
कुछ अधूरे ख्वाब मन में ऐसे बैठ गए
जाने कब ये बोझ बन कर रह गए,
ज़िन्दगी की पटरी और अधूरे ख्वाबों की गठरी,
सताते हैं मुझे और बताते हैं इंसान की मजबूरियां,
मेरे अधूरे सपने...

#SwetaBarnwal

I am a girl...

Because I am a girl...

I want to live on my principles,
Wanna fly in the open air,
Where there is no wall of ritual-customs,
Whatever I do, there is no restrictions,
Is it possible,
May be not,

Because I am a girl...

Everyone's eyes on me,
This people- society keeps an eye on my every move,
I wish too
Touch the height of sky,
Dives in the ocean of dream,
But My dreams, my desirs all die inside of me
I just have to stay with in a limit,

Because I am a girl...

My mother often tells me,
You are a girl, you have a boundary,
Never do such a thing which will embarrassed us.
She never says such lines to my brother

Because I am a girl...

I have to accept everything from mother,
I just have to live in the dignity of our society,
I can't go away from this

Because I am a girl...

#SwetaBarnwal

Sunday, 17 November 2019

ये ज़िन्दगी...

ना जाने किस ओर जा रही है ये ज़िन्दगी,
हमारी हो कर हमसे ही मुंह मोड़ रही है ये ज़िन्दगी,
ना जाने कितने ही सपने सजाए थे इन आंखों ने,
आंखों से बस लहु बहा रही है ये ज़िन्दगी,
चाहूं मैं कुछ और रुख कोई और ले रही है ज़िन्दगी,
ना जाने कैसे कैसे खेल खेल रही है ये ज़िन्दगी,
कभी रो रही है कभी रुला रही है ये ज़िन्दगी,
बेबस कर हमें मुस्कुरा रही है ये ज़िन्दगी,
एक हल्की सी मुस्कान के लिए तरसा रही है ये ज़िन्दगी,
अजीब सी कश्मकश में उलझी हुई है ये ज़िन्दगी,
गमों के मझधार में अटकी पड़ी है ये ज़िन्दगी,
भुला कर मेरा वजूद मुंह मोड़ रही है ये ज़िन्दगी,
ख़ुद से ही बेज़ार हो रही है ये ज़िन्दगी,
वक़्त के हाथों से फिसलकर ये लम्हें छूट रहे हैं,
अश्रु की ये धारा हर उम्मीद धो रहे हैं,
दिल के एहसासों को झुलसा रही है ये ज़िन्दगी,
मोहब्बत के धागों को ना जाने क्यूं उलझा रही है ये ज़िन्दगी,
वक़्त के आगे खिलौना बन कर रह गई है ये ज़िन्दगी,
जो कभी मेरी थी आज अनजान बन कर रह गई ये ज़िन्दगी,
आज फिर से एक बार सहम सी गई है ये ज़िन्दगी,
ना जाने अब तक किस वहम में गुजर रही थी ये ज़िन्दगी,
टूट कर रह गया है हर डोर विश्वास का,
ना जाने किस के सहारे गुज़र रही है ये ज़िन्दगी,
मेरी हो कर मुझसे ही दगा कर रही है ये ज़िन्दगी,
बस कुरुक्षेत्र बन कर रह गई है ये ज़िन्दगी,
हर मोड़ पर दम तोड़ रही है ये ज़िन्दगी...


#SwetaBarnwal


हे प्रभु..! 
तूने ये कैसी रित बनाई है
बेटी हो या बहू, 
हर रूप में लड़कियां पराई है...

#SwetaBarnwal

वो शख्स...

मेरी हंसी के पीछे के हर दर्द को
वो पहचान जाता है,
वो शख्स मुझे कितना समझता है
जो हर मर्म को जान जाता है
कहते नहीं है कुछ भी लब मेरे
और एक वो है जो बिन कहे भी
सबकुछ जान जाता है
जो छुपा रखा है ख़ुद से भी मैंने
उन बातों को भी वो जान जाता है
मेरे मुस्कान के पीछे छुपे
आंसुओं को पहचान जाता है
वो शख्स हर हाल में
मेरी उदासी के सबब को जान जाता है
दिल की आरज़ू है वो मेरी
या फिर है वो मेरा हम साया
हर बार मुझसे पहले ही वो
मेरे जज़्बातों को थाम लेता है...


#SwetaBarnwal

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...