Monday, 18 November 2019

मेरे अधूरे सपने...

इन आंखों ने भी सजाए थे कई सपने,
कुछ पूरे हुए तो कुछ टूट गए
कुछ बेवजह ही मुझसे रूठ गए,
कुछ जीने नहीं देते और कुछ मरने नहीं देते,
मेरे अधूरे सपने...
कुछ अश्कों में बह कर चले गए,
कुछ भोर होते ही निकल लिए,
कुछ सांसों के साथ जुड़े बैठे हैं,
कुछ से जंग अभी भी जारी है,
मेरे अधूरे सपने...
अधूरे सपनों पे मैंने अपनी इमारत खड़ी की है,
भाग दौड़ की ज़िन्दगी में वक़्त से रेस लगाई है,
हार हमने भी मानी नहीं, ज़िद हमने छोड़ी नहीं,
जब तक सांस है आस की डोर हमने तोड़ी नहीं
मेरे अधूरे सपने...
कुछ बालपन में देखे थे,
कुछ जीवन पग पे सजाए थे,
कुछ याद हमेशा आते हैं,
कुछ भूले नहीं भुलाए जाते हैं,
मेरे अधूरे सपने...
कुछ अधूरे ख्वाब मन में ऐसे बैठ गए
जाने कब ये बोझ बन कर रह गए,
ज़िन्दगी की पटरी और अधूरे ख्वाबों की गठरी,
सताते हैं मुझे और बताते हैं इंसान की मजबूरियां,
मेरे अधूरे सपने...

#SwetaBarnwal

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