Saturday, 23 November 2019

जिंदगी की किताब...

आज पलट कर देखा जो जिंदगी की किताब को,
तेरे साथ गुज़रा हर पल, हर लम्हा याद आ गया,

याद आई तेरी वो बातेँ तुझसे हर मुलाकातें,
दिल से दिल जुड़ा था हमारा,
प्यार जहां से जुदा था हमारा,
मुश्किल था बहुत एक दूजे के बिन जी पाना,
ख्यालों में था हमारा आना जाना,
तेरे ही ख्वाबों मे गुज़रती थी रातें हमारी,

आज पलट कर देखा जो जिंदगी की किताब को,
तेरे साथ गुज़रा हर पल, हर लम्हा याद आ गया,

वो छोटी छोटी बातों मे रूठना मनाना,
वो एक दूसरे के सीने से लग हर ग़म भूल जाना,
हमारी हर चाहत बस एक दूसरे का साथ चाहती थी,
खुशियाँ एक दूसरे का बेपनाह चाहती थी,
एक दूसरे की झलक से दिल को सुकून मिलता था,
बिन कहे दिल के हर जज़्बात समझ लेते थे,

आज पलट कर देखा जो जिंदगी की किताब को,
तेरे साथ गुज़रा हर पल, हर लम्हा याद आ गया...

ना जाने फिर कैसा मोड़ आया जिंदगी में,
जो दिल के सबसे करीब था
वो ही हाथों की लकीरों मे ना था,
किसी को खूबियों से प्यार होगा,
हमें तो खामियों से भी प्यार था,
फिर भी ना जाने क्यूँ क़िस्मत पे ऐतबार ना था,
जो दिल के करीब था वही नजरों से दूर हो गया,

आज पलट कर देखा जो जिंदगी की किताब को,
तेरे साथ गुज़रा हर पल, हर लम्हा याद आ गया...

#SwetaBarnwal

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