Friday, 15 November 2019

आत्महत्या...

बड़ी आसानी से जिस ज़िन्दगी को तुम एक पल में गंवा बैठते हो,
कभी सोचा है उस जीवन को लाने में एक मां को नौ महीने लगते हैं,
अपने खून को जलाती है अपने दूध से वो सिंचती है,
ना जाने किस दर्द से वो गुजरती है तब जाकर उसमे वो जान भरती है,
बड़ी ही जतन से एक पिता ने पाला था जिसे उसे एक पल में गंवा देते हो,
ना जाने किस बात का मलाल रहा होगा दिल में,
ना जाने कैसे कैसे सवाल दिए होंगे उसको ज़िन्दगी ने,
ऐसे भी क्या हालात थे, ना जाने कैसे कैसे जज़्बात थे,
क्यूं ऐसा कदम उठा गया वो, क्यूं अपनों को भुला गया वो,
क्यूं एक बार भी उसका नहीं सोचा जिसने उसके लिए अपना सब कुछ गंवाया,
ऐसी भी क्या मजबूरी थी, क्यूं आत्महत्या इतनी जरूरी थी,
क्यूं वो अपना दर्द किसी से कह ना पाया, क्यूं जीवन को दांव पर लगा बैठा,
माना ऊंची नीची राह है ज़िन्दगी की,आसान नहीं था पार उतरना,
पर क्या मौत इतनी आसान लगी जो याद आया ना कोई चेहरा,
एक बार जरा तुम रुक जाते कुछ अपनी कहते कुछ औरो की सुनते,
कोई मुश्किल इतनी बड़ी नहीं जिसका मिलता कोई समाधान नहीं,
बस एक बार हाथ तुम बढ़ा जाते ज़िन्दगी को गले से लगा जाते,
#आत्महत्या का फ़िर ख़्याल ना आता जीवन से मोह जगा जाता...
बस एक बार अगर जो सोचा होता क्या होगा तेरे जाने से,
क्या गुजरेगी तेरे मां बाप पर, क्या होगा तेरे सगे संबंधों का,
प्रियजनों को रोते छोड़ गया तू सब से रिश्ते तोड़ गया तू,
नादान कहूं तुझे या फिर शैतान कहूं, पर जो भी था किसी की संतान था तू,


#SwetaBarnwal

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