Tuesday, 19 November 2019

अधूरी कविता...

वो अक़्सर हमसे कहते हैं
बड़ा दर्द झलकता है
तुम्हारी कविता में,
लगता है बड़ा अधूरा सा,
कुछ खाली खाली सा,
कुछ सूना सूना सा
कुछ दबा दबा सा,
कुछ अनकहा अनसुना सा,

सच ही तो कहा है
झलकता है उसमे मेरा वजूद,
कुछ अधूरी सी मुस्कुराहट,
कुछ खोखली सी हंसी,
कई अधूरे से ख्वाब,
कहीं टूटे हुए जज़्बात,
तकिए में गुम हुए आंसुओं की धार
चादर में लिपटी हुई ख़ामोश सिसकियां,
कुछ अनकहे एहसासों के पुलिंदे
कुछ बिखरे बिखरे से हालात,

गर ज़िन्दगी कहानियों सी खूबसरत होती,
तो शायद ही काविताओं में किसी की रुचि होती...

#SwetaBarnwal


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