Friday, 16 November 2018

बेमेल प्यार... 😜

उम्र तेरी है पचपन की
और मैं यौवना तीस की प्रिये
इश्क़ करना तेरे बस की बात नहीं,
ना ही तुम चाहो इसे निभाना प्रिये 
अब तो तुम्हीं बता दो एक बार
कैसे होगा अपना मेल प्रिये

मैं अल्हड़ चंचल नदी सी 
तुम धीर भीर समंदर सा गंभीर प्रिये 
मन आतुर है मेरा तेरे लिए 
और तु दुनियादारी मे लिप्त प्रिये 

कैसे होगा अपना मेल प्रिये

तुम वाक पटुता मे माहिर 
मैं बाला मदमस्त पागल सी प्रिये 
सारी जिम्मेवारी तुझ पर हावी 
और मैं तुझ पर जाऊं वारी प्रिये 

कैसे होगा अपना मेल प्रिये

दो पल का भी वक़्त नहीं तेरे पास 
और मैं पलकें बिछाए बैठी तेरे लिए 
तु बूंद बूंद बन बरसता है और 
मैं बिन बारिस मछली बन तरसती प्रिये 

कैसे होगा अपना मेल प्रिये

इस दिवानी की ना कोई आरज़ू है,
ना ही कुछ पाने की कोई ज़ुस्तज़ू है,
बस तु ख़ुश रहे यही है अपनी ख्वाहिश प्रिये
ये इश्क़ नहीं है कोई खेल प्रिये,

कैसे होगा अपने मेल प्रिये...


#SwetaBarnwal






वक़्त की महत्ता...

वक़्त का पहिया चलता है,
चलता है ये चलता है
कभी ना ये फिर रुकता है
चलता है ये चलता है

सबसे ये कुछ कहता है
किसी की ना ये सुनता है
वक़्त किसी का हुआ ना अब तक
ना पीछे कभी ये मुड़ता है,

साथ इसके चल सके जो तुम
दुनिया तेरी गुलाम हो
अपनी धुन में चलता है ये
किसी की ना इसको परवाह है

वक़्त वक़्त की बात है प्यारे
वक़्त कभी ऐसा भी वक़्त दिखाता है
अच्छे अच्छों की चाल पलट दे
ये एक ऐसी सीख सिखाता है

वक़्त से आगे कोई चल ना पाया
ऐसी वायु सी तीव्र इसकी चाल है
वक़्त पे जो ना चले रे भइया
मुह की वो हरदम खाता है

इस दुनिया में ऐसा कोई नहीं रे प्यारे
जो इस वक़्त से आज़ाद हो
सूरज, चंदा, धरती और तारे
सारे वक़्त के ही मोहताज़ है

वक़्त की मार से कोई बच ना पाया
कुछ टेढ़ी इसकी चाल है
जिसने भी की है कद्र वक़्त की
उसने ही इस जग में पाया सम्मान है

वक़्त का पहिया चलता है,
चलता है ये चलता है
कभी ना ये फिर रुकता है
चलता है ये चलता है...

#SwetaBarnwal


Thursday, 15 November 2018

एक हसरत-ए-दिल है कि हम रूठे और वो भी कभी आकर मनाएं हमे,
पर बदकिस्मती अपनी, इश्क़ मे अपने वो मुकाम कभी आया ही नहीं...

#SwetaBarnwal 

Saturday, 10 November 2018

लिख दूँ...

आज कलम उठाया सोचा एक ग़ज़ल लिख दूँ
उनसे हुई जो मोहब्बत उस की दास्तां लिख दूँ,

अजनवी बन कर मिले और दिल मे समाते गए
मिली जो नज़र धड़कनों की हलचल लिख दूँ

तेरे साथ बीते हुए लम्हों की खलिस लिख दूँ
अपनी उस पहली मुलाकात की तपिश लिख दूँ,

रोज छुपते छुपाते उनसे लंबी बातें करना
मेरी शायरी मे तेरे लिए छुपे जज़्बात लिख दूँ,

चोरी चोरी नज़रों से देख कर नज़रें चुराना तेरा
जी चाहता है तेरी तिरछी नज़रों की चोरी लिख दूँ,

वो तेरी हर कविता में मेरी ही छवि बयां थी
तु कहे तो आज ये तेरा इकरार नामा लिख दूँ,

वो पहाड़ों की ऊंचाई पे तेरा हाथ देना मुझे
बहाने से तेरा उन हाथों को दबाना लिख दूँ,

हर बहाने से बस एक दूजे से बातें करना
वो मेरा रूठना और खुद मान जाना लिख दूँ,

ओ हरज़ाई वो एक पल मे ही तेरा बदल जाना
वो तेरी बेवफ़ाई तेरा भूल जाना लिख दूँ,

कैसे कह दूँ मैं यारा कि तू पत्थर दिल है
तु खुश रह इसे मैं वक़्त की बेवफ़ाई लिख दूँ...

#SwetaBarnwal





Friday, 9 November 2018

हम और वो...

राह-ए-मोहब्बत मे अपने वो मुकाम ना आया
हमे रूठना ना आया उन्हें मनाना ना आया

ज़िन्दगी ने फ़िर हमारे ऐसा नग्म गाया
हमे गाना ना आया उन्हें गुनगुनाना ना आया

वो चाहत की जमीं जिसे बड़े प्यार से तराशा था
हमे सजाना ना आया तुझे संजोना ना आया

सारी रात कट गई इन आँखों में ख्वाब लिए
हमे जागना ना आया उन्हें जगाना ना आया

शिकवे शिकायतों की धूंध गहरी होती गई
हमे भूलना ना आया उन्हें भूलाना ना आया

अरसा गुज़रता गया दूरियां बढ़ती ही गई,
हमे लौटना ना आया उन्हें बुलाना ना आया

जज़्बातों में कहीं कोई कमी रह गई शायद
हमे संभलना ना आया उन्हें संभालना ना आया

मोहब्बत की दौलत से हम दोनों थे अनजान
हमे कमाना ना आया उन्हें बचाना ना आया

राह-ए-मोहब्बत मे अपने वो मुकाम ना आया
हमे रूठना ना आया उन्हें मनाना ना आया...

#SwetaBarnwal





जितना तुझे भूलना चाहूँ,
तु उतना ही याद आता है,
क्या है ऐसा तुझमे यारा
जो तू दूर हो कर भी दूर होता नहीं...

#SwetaBarnwal

Thursday, 1 November 2018

ऐ माँ...! 🙏

ऐ माँ ...!
बस इतनी सी मेरी अरज़ सुन ले,
मन में भक्ति भाव बसर कर दे,
हो जीवन में खुशियों का डेरा
छाए ना कभी घनघोर अंधेरा
ऐ माँ ...!
चाहूँ ना कभी कोई बंग्ला अटारी
बस छोटा सा अपना घर कर दे
हो हर पल जहां प्यार का बसेरा
मुस्कुराहटों से हो हर रोज सवेरा
ऐ माँ ...!
ना हो मन में कोई दुर्भावना बसर
बस इतनी सी माँ तू मेहर कर दे
हर बुराइ से मैं सदा दूर रहूँ
दिल में मेरे प्रेम की ज्योत जला दे
ऐ माँ ...!

#SwetaBarnwal





ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...