Friday, 9 November 2018

हम और वो...

राह-ए-मोहब्बत मे अपने वो मुकाम ना आया
हमे रूठना ना आया उन्हें मनाना ना आया

ज़िन्दगी ने फ़िर हमारे ऐसा नग्म गाया
हमे गाना ना आया उन्हें गुनगुनाना ना आया

वो चाहत की जमीं जिसे बड़े प्यार से तराशा था
हमे सजाना ना आया तुझे संजोना ना आया

सारी रात कट गई इन आँखों में ख्वाब लिए
हमे जागना ना आया उन्हें जगाना ना आया

शिकवे शिकायतों की धूंध गहरी होती गई
हमे भूलना ना आया उन्हें भूलाना ना आया

अरसा गुज़रता गया दूरियां बढ़ती ही गई,
हमे लौटना ना आया उन्हें बुलाना ना आया

जज़्बातों में कहीं कोई कमी रह गई शायद
हमे संभलना ना आया उन्हें संभालना ना आया

मोहब्बत की दौलत से हम दोनों थे अनजान
हमे कमाना ना आया उन्हें बचाना ना आया

राह-ए-मोहब्बत मे अपने वो मुकाम ना आया
हमे रूठना ना आया उन्हें मनाना ना आया...

#SwetaBarnwal





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