Thursday, 22 November 2018

अनजान रिश्ता...

तेरा मेरा रिश्ता प्यारा सा पर अनजाना सा,
अपनों से भी अपना दुनिया से बेगाना सा,
वक़्त और ख़ुदा के सिवा ना है कोई गवाह,
बेतरतीब सी ज़िंदगी का है ये कोई ख़ुदा,
वो ना होते तो ज़िन्दगी इतनी हसीं ना होती,
कुछ मोहब्बत ऐसे भी होते हैं इस जहां मे
जिनका ना कोई वजूद होता है ना कोई मंज़िल,
बस उनके होने का एहसास कर जाता है जवां,
बहुत खूबसूरत होता है उनके साथ का एहसास,
मिल कर जिनसे ज़िन्दगी होती है बड़ी खास,
अधूरी है वो मोहब्बत फ़िर भी सुकून देती है,
अधूरी और बिखरी सी ज़िंदगी में नई जान देती है,

#SwetaBarnwal



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