आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
दिल में सोए हुए अरमां जगने लगे कुछ ऐसे,
तु मेरे करीब नहीं और मैं तेरी यादों से दूर नहीं,
आज फ़िर आँखों से बरसात हुई कुछ ऐसे,
आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
बहुत दूर निकल चुका था वो शायद मुझसे,
हम आज भी उसी मोड़ पर खड़े थे कुछ ऐसे,
हाथों में मेरे अब उसका हाथ ना था,
रूह में अब भी शामिल था वो कुछ ऐसे,
आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
मन में मेरे फ़िर से उमंगे जवां होने लगे,
हवाओं ने फ़िर वो साज़ छेड़ा आज कुछ ऐसे,
खुशबु वही फ़िर से फैली है फिज़ाओं मे,
कोई शीतल हवा तुम्हें छु कर आई कुछ ऐसे
आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
तेरे लौट आने का जैसे इंतज़ार है इन आँखों को,
अरसा गुज़र गया पर वक़्त वहीं रुका हो जैसे,
वफ़ा करके भी वफ़ा पा ना सके हम उनसे,
अपनी किस्मत ही दगा दे गई शायद कुछ ऐसे,
आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
ज़ख़्म फिर से हरे हो गए आज कुछ ऐसे,
आँख भर आई यार आज फ़िर किसी बात से,
क्यूँ हर को मोहब्बत नहीं मिलती मोहब्बत के बदले,
बस इसी बात पर आज फ़िर दिल टूटा कुछ ऐसे,
आज फ़िर से तुम्हारी याद आई कुछ ऐसे...
#SwetaBarnwal

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