चहूं ओर मेरे जब अंधियारा हो,
जब कोई ना अपना सहारा हो,
जब जीवन नैया डोल रही हो,
और कोई ना अपना खेवईया हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना,
जब मन मेरा अति व्याकुल हो,
जब ख़ुद से ही मैं हारा रहूँ,
जब साथ कोई ना साथी हो,
और तन्हाई की लंबी रातें हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना,
जब सामने कोई ना राह हो,
ना मंज़िल की पहचान हो,
जब हर मोड़ पे डर का डेरा हो,
मन के अंदर घनघोर अंधेरा हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना,
जब बाधाओं ने मुझको घेरा हो,
सारी दुनिया ने तन्हा छोड़ा हो,
जब हर ओर अविश्वास का साया हो,
आँखों में मेरे आँसू समाया हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना...
#SwetaBarnwal
जब कोई ना अपना सहारा हो,
जब जीवन नैया डोल रही हो,
और कोई ना अपना खेवईया हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना,
जब मन मेरा अति व्याकुल हो,
जब ख़ुद से ही मैं हारा रहूँ,
जब साथ कोई ना साथी हो,
और तन्हाई की लंबी रातें हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना,
जब सामने कोई ना राह हो,
ना मंज़िल की पहचान हो,
जब हर मोड़ पे डर का डेरा हो,
मन के अंदर घनघोर अंधेरा हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना,
जब बाधाओं ने मुझको घेरा हो,
सारी दुनिया ने तन्हा छोड़ा हो,
जब हर ओर अविश्वास का साया हो,
आँखों में मेरे आँसू समाया हो,
तब साथी तुम हाथ बढ़ा देना,
कुछ कदम संग मेरे तुम चल लेना...
#SwetaBarnwal
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