उम्र तेरी है पचपन की
और मैं यौवना तीस की प्रिये
इश्क़ करना तेरे बस की बात नहीं,
ना ही तुम चाहो इसे निभाना प्रिये
इश्क़ करना तेरे बस की बात नहीं,
ना ही तुम चाहो इसे निभाना प्रिये
अब तो तुम्हीं बता दो एक बार
कैसे होगा अपना मेल प्रिये
मैं अल्हड़ चंचल नदी सी
तुम धीर भीर समंदर सा गंभीर प्रिये
मन आतुर है मेरा तेरे लिए
और तु दुनियादारी मे लिप्त प्रिये
कैसे होगा अपना मेल प्रिये
तुम वाक पटुता मे माहिर
मैं बाला मदमस्त पागल सी प्रिये
सारी जिम्मेवारी तुझ पर हावी
और मैं तुझ पर जाऊं वारी प्रिये
कैसे होगा अपना मेल प्रिये
दो पल का भी वक़्त नहीं तेरे पास
और मैं पलकें बिछाए बैठी तेरे लिए
तु बूंद बूंद बन बरसता है और
मैं बिन बारिस मछली बन तरसती प्रिये
कैसे होगा अपना मेल प्रिये
इस दिवानी की ना कोई आरज़ू है,
ना ही कुछ पाने की कोई ज़ुस्तज़ू है,
बस तु ख़ुश रहे यही है अपनी ख्वाहिश प्रिये
ये इश्क़ नहीं है कोई खेल प्रिये,
कैसे होगा अपने मेल प्रिये...
इस दिवानी की ना कोई आरज़ू है,
ना ही कुछ पाने की कोई ज़ुस्तज़ू है,
बस तु ख़ुश रहे यही है अपनी ख्वाहिश प्रिये
ये इश्क़ नहीं है कोई खेल प्रिये,
कैसे होगा अपने मेल प्रिये...
#SwetaBarnwal

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