Saturday, 10 November 2018

लिख दूँ...

आज कलम उठाया सोचा एक ग़ज़ल लिख दूँ
उनसे हुई जो मोहब्बत उस की दास्तां लिख दूँ,

अजनवी बन कर मिले और दिल मे समाते गए
मिली जो नज़र धड़कनों की हलचल लिख दूँ

तेरे साथ बीते हुए लम्हों की खलिस लिख दूँ
अपनी उस पहली मुलाकात की तपिश लिख दूँ,

रोज छुपते छुपाते उनसे लंबी बातें करना
मेरी शायरी मे तेरे लिए छुपे जज़्बात लिख दूँ,

चोरी चोरी नज़रों से देख कर नज़रें चुराना तेरा
जी चाहता है तेरी तिरछी नज़रों की चोरी लिख दूँ,

वो तेरी हर कविता में मेरी ही छवि बयां थी
तु कहे तो आज ये तेरा इकरार नामा लिख दूँ,

वो पहाड़ों की ऊंचाई पे तेरा हाथ देना मुझे
बहाने से तेरा उन हाथों को दबाना लिख दूँ,

हर बहाने से बस एक दूजे से बातें करना
वो मेरा रूठना और खुद मान जाना लिख दूँ,

ओ हरज़ाई वो एक पल मे ही तेरा बदल जाना
वो तेरी बेवफ़ाई तेरा भूल जाना लिख दूँ,

कैसे कह दूँ मैं यारा कि तू पत्थर दिल है
तु खुश रह इसे मैं वक़्त की बेवफ़ाई लिख दूँ...

#SwetaBarnwal





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