Thursday, 15 November 2018

एक हसरत-ए-दिल है कि हम रूठे और वो भी कभी आकर मनाएं हमे,
पर बदकिस्मती अपनी, इश्क़ मे अपने वो मुकाम कभी आया ही नहीं...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...