Thursday, 9 May 2019

मस्तमौला...

चलती रही मैं अपनी धुन में
कभी पलट कर नहीं देखा
जो भी किया दिल से किया
कभी अपना फायदा नहीं देखा
ठोकरों में रखा जमाने को अपने
कभी दुनियादारी नही देखा
अपने मन की चली हर चाल
कभी दुनिया का कायदा नहीं देखा

#SwetaBarnwal

Tuesday, 7 May 2019

समय...

अब तक की ज़िंदगी में आपने
बहुत कुछ पाया होगा
तो बहुत कुछ खोया होगा
किसी को ठुकराया होगा
तो किसी को गले लगाया होगा
किसी को कभी सताया होगा
तो किसी को मनाया भी होगा
किसी के आँसुओं की वजह बने होगे
तो किसी को कभी हंसाया भी होगा
कभी खुशी तो कभी दर्द हिस्से में आया होगा
किए होंगे मन चाहे काम कई बार
तो कभी प्रभु इक्षा को ही अपनाया होगा
कभी जीत का परचम लहराया होगा
नए अनुभवओं से गलतियों को सहलाया होगा
शायद छीन ली हो किस्मत ने
आपसे आपकी प्यारी चीज कोई
पर कहीं किसी मोड़ पर
नई अनमोल चीज से जरूर मिलाया होगा
आप भले ही ना बदले हों ज़िंदगी की दौड़ में
पर आपका कोई ना कोई अंदाज़ तो बदला होगा
अपनी खुशियों को सबके साथ बांटा होगा
हर गम को अकेले ही गले लगाया होगा
कभी ना कभी तो सपनो पे कला साया मंडराया होगा
भीड़ में रहकर भी तन्हाई का दामन थामा होगा
गुज़र रहा है ये वक़्त वो सारे बीते पल समेट कर
जिस पर आपने कभी अपना हक़ जताया होगा
जी भर कर जी लो ये जो #आज जा रहा है
लाख कर लो जतन ये #समय लौट कर नहीं आएगा, 
समेट लो हर इक लम्हें को, ना फिर ये दौर आएगा, 
यादों के पंख लगा ये वक़्त कहीं उड़ जाएगा... 


#SwetaBarnwal



कोई पूछे...

कोई पूछे तुमसे कौन हूँ मैं
तो कह देना कोई खास नहीं
एक साथी है कच्चा पक्का सा
एक झूठ है आधा सच्चा सा
कोई पूछे तुमसे...
जज़्बात के मन पे पर्दा सा
बस एक बहाना जो है अच्छा सा
जो पास होकर भी पास नहीं
पर उसका छुपा कोई राज़ नहीं
कोई पूछे तुमसे...
एक ख्वाब है वो अनजाना सा
सच भी उसका बेमाना सा
एहसास है उसका मीठा सा
पर प्यार है उसका झूठा सा
कोई पूछे तुमसे...
चंदा की किरणों सा है शीतल
कोई सोना नहीं वो है पीतल
कोई भी उसके साथ नहीं
और सच की उसको आस नहीं
कोई पूछे तुमसे...

#SwetaBarnwal 

Monday, 6 May 2019

आँसू...

यारों बड़ी ही अजीब होती है ये आँसू
खुशी हो या ग़म सबमें एक सी बहती है ये
कभी अपनों के लिए बहती है ये आँसू
तो कभी अपनों की वजह से बहती है यारों
कभी दिलबर की चाहत में बहती है ये
तो कभी दिलबर की बेवफ़ाई का सबब बनती है
कभी मोहब्बत मे निकल पड़ती है ये
तो कभी नफरत मे भी निकल पड़ते हैं आँसू
कभी सच का एक मात्र गवाह है ये
तो कभी झूठ की बुनियाद है ये आँसू
कभी अकेले में निकल पड़ते हैं ये
तो कभी महफ़िल में अकेला कर जाते हैं आँसू
कभी यादों के साथ लिपट कर आ जाते हैं
कभी बेवजह आँखो से लुढ़क जाते हैं ये


#SwetaBarnwal

मुस्कुराहट...

वक़्त कट ही जाएगा
यूँ मुस्कुरा कर जीने मे,
कोई रोक सके
हमारे बढ़ते कदम को
कहाँ इतना दम है
गर्दिश-ए-ज़माने मे,
आँधियों से लड़ने का
शौख है दिल में
कोई हमे झुका सके
कहाँ इतना दम है
गम के तूफानों में,
चाहे आएं कैसे भी
दौर इस जीवन में
हम तो वक़्त के
मुसाफ़िर हैं
हर बला को तोड़ कर
आगे बढ़ जाते हैं
आँधियों मे बनाए हैं
हमने घर अपने
सर पर कफ़न बांध
राहों में चले हैं अपने
मुट्ठी में है कैद
सारा जहां अपने
देख ले जो एक बार
मुस्कुरा कर किसी को
जमाना भी झुक जाए
वहां सज़दे मे अपने
है मन मे जोश-ए-जुनून
और दिल मे मोहब्बत भरी
एक पल मे सबको अपना बना ले
ऐसी है कुछ आदत अपनी
हल हो जाए हर मुश्किल
यूँ ही चुटकियों में अपने
मुस्कुरा कर जो देखा
हमने ज़िंदगी को अपने...

#SwetaBarnwal



Friday, 3 May 2019

स्त्री हैं हम...

स्त्री हैं हम, हमे तुम नादान ना समझना
अब तक जो किया सो किया अब हमे लाचार ना समझना
तुम्हारी हर बात हर शर्त मंज़ूर है हमे
पर हमारे अस्तित्व के साथ कभी खिलवाड़ ना करना
पुत्र से पिता तक का सफ़र तुम्हें हमने कराया
इस बात का हमेशा तुम मान रखना
हमारे विश्वास के साथ कभी ना विश्वासघात करना
माँ, बहन, बीवी, पत्नी, पुत्री, सखी या हो कोई अनजान
हर रूप में इसका तुम सम्मान करना
तुम्हारे सृजन का कारक तुम्हारी जननी है हम
कभी हमे तुम कमजोर  ना समझना
अपनी हर इक्षाओं को तुम हमपे ना थोपना
कभी पैरों तले हमारे अरमानों को ना रौंदना
जीवन है हममे भी ये बात याद रखना
ख़ुद को हमारा भगवान मत समझना
एक नारी की कोख से जन्म लेकर
किसी नारी का कभी अपमान मत करना
ज़िन्दगी है उसमे भी उसे सामान मत समझना
औरत की जिस्म का सौदा करने वाले
नपुंसक हो तुम, ख़ुद को कभी मर्द मत समझना
लूट कर जिस्म औरतों का महान तुम बन ना पाओगे
रुला कर हमे तुम भी चैन से जी ना पाओगे
समुन्दर से भी गहरी है चाहतें हमारी
अपने शौर्य बल से इसे हासिल ना कर पाओगे
जब जब चाहा तुमने हम पर अत्याचार किया
हर बार हमारे वज़ूद पर वज्र सा प्रहार किया
कभी सिता बन अग्नि में चली
तो कभी राधा बन विरह की अग्नि में जली
कभी द्रौपदी बन भरी सभा में लुटी गई
तो कभी अहिल्या बन पत्थर की मूरत बनी
कभी तीन तलाक के ज़हर से मारा हमे
कभी हलाला का ज़हर हमारी ज़िंदगी में उडे़ला
जब चाहा तुम गरज़े हम पर जब चाहा तुम बरसे
चुपचाप तुम्हारी दी हर यातना हम सहते गए
आँखें रोती रही पर लफ़्ज़ों से हम कुछ ना कहे
हम ख़ामोश सहते गए और तुम गुनाह करते गए
है गुरूर इतना ख़ुद पर तो कभी स्त्री बन कर जीना
स्त्री बन जीना यूँ पुरुष होने सा आसान ना समझना
स्त्री हैं हम, हमे तुम नादान ना समझना
अब तक जो किया सो किया अब हमे लाचार ना समझना
तुम्हारी हर बात हर शर्त मंज़ूर है हमे
पर हमारे अस्तित्व के साथ कभी खिलवाड़ ना करना ...


#SwetaBarnwal


ना जाने क्यूँ....!

ना जाने क्यूँ अब
ज़िन्दगी मे वो बात नहीं है...

ना किसी रिश्ते मे प्यार और विश्वास ज़िंदा है
और ना ही अपनेपन का अहसास बाकी है
कभी बुजुर्गों के आशीर्वाद मे बरकत हुआ करती थी
अब तो माँ बाप भी बोझ बन कर रह गए हैं
कभी यारों से बता दिया करते थे हर बात दिल की
ना जाने क्यूँ अब यारों की यारी मे वो बात नहीं है

ना जाने क्यूँ अब
ज़िन्दगी मे वो बात नहीं है...

बिंदास मस्त मौला सी हुआ करती थी ज़िन्दगी अपनी
चेहरे के उपर किसी के कोई दूसरा चेहरा नहीं होता था
खुली किताब हुआ करती थी अपनी ज़िन्दगी
पड़ोसियों के भी खुशी और गम में शरीक हुआ करते थे
आज इंटरनेट के जरिए पूरी दुनिया से जुड़ गए हैं हम
पर जरूरत पड़ने पर कोई भी अपने साथ नहीं है

ना जाने क्यूँ अब
ज़िन्दगी मे वो बात नहीं है...

बहन भाई मे दुलार बहुत होता था
माँ बाप के चरणों में स्वर्ग हुआ करता था
होठ हिले बिना हाल बयां हुआ करता था
पल मे हर समस्या का समाधान हुआ करता था
ना जाने क्यूँ अब वो एहसास नहीं है
ना जाने क्यूँ साथ हो कर भी हम पास नहीं है

ना जाने क्यूँ अब
ज़िन्दगी मे वो बात नहीं है...

भावनायें दफ़न हो चुकी है दिलों में
इंसान बहुत ज्यादा व्यवहारिक हो गया है
धमनियों में लहू की जगह पानी बहने लगा है
सारे रिश्ते अब बेमानी हो चुके हैं
मशीन बन गए हैं हम सारे खो गई है इंसानियत
ना जाने क्यूँ अब हर रिश्ते में वो प्यार नहीं है

ना जाने क्यूँ अब
ज़िन्दगी मे वो बात नहीं है...

संयुक्त परिवार का दमन हो चुका है
एकल परिवार ने लोगों को स्वार्थी बना दिया है
घर में बुजुर्गों की जगह आया ने ले ली है
और पश्चिमी सभ्यता ने वृद्धाश्रम को पनपाया है
दादी नानी की कहानियां बस कहानी बन कर रह गई
ना जाने क्यूँ अब रिश्तों में वो मिठास नहीं है

ना जाने क्यूँ अब
ज़िन्दगी मे वो बात नहीं है...



ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...