Monday, 6 May 2019

आँसू...

यारों बड़ी ही अजीब होती है ये आँसू
खुशी हो या ग़म सबमें एक सी बहती है ये
कभी अपनों के लिए बहती है ये आँसू
तो कभी अपनों की वजह से बहती है यारों
कभी दिलबर की चाहत में बहती है ये
तो कभी दिलबर की बेवफ़ाई का सबब बनती है
कभी मोहब्बत मे निकल पड़ती है ये
तो कभी नफरत मे भी निकल पड़ते हैं आँसू
कभी सच का एक मात्र गवाह है ये
तो कभी झूठ की बुनियाद है ये आँसू
कभी अकेले में निकल पड़ते हैं ये
तो कभी महफ़िल में अकेला कर जाते हैं आँसू
कभी यादों के साथ लिपट कर आ जाते हैं
कभी बेवजह आँखो से लुढ़क जाते हैं ये


#SwetaBarnwal

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