Wednesday, 1 May 2019

इंतज़ार...

शून्य में झांकती मेरी निगाहें
तेरे दीदार को तरसती है ये आँखें
कब आओगे तुम पिया मोरे
सूनी पड़ी है मेरे दिल की राहें,
तेरे इंतज़ार में मैंने सदियाँ गुज़ारी
फीके पड़ गए सोलह श्रृंगार सारे
थकने लगा है मेरा मन
सूना पड़ा है घर का आँगन
कितने ही मौसम बित गए
फ़िर से आ गई सावन की बरखा
सजन मिलन को दिल तरसे
हर पल हर क्षण नैना बरसे
ना उम्मीद से हो बैठे हैं हम
मौत के कितने करीब हो बैठे हैं हम
एक वक़्त था जो हवा की तरह उड़ रहा था
और एक वक़्त है जो यादों की बोझ से रुक सा गया है
बस एक बार आ जाओ तुम मेरा नाम लेकर
कि इंतज़ार में ख़ामोशी बहुत शोर करती है ..

#SwetaBarnwal

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