यूँ तो बहुत कुछ था पास मेरे
अब तन्हाई के सिवा कुछ नहीं
किसी ने हमे अपना बनाया
तो किसी ने नज़रें फेर ली
बहुत कुछ संभाल रखा है
इन आँखों में हमने तेरे लिए
जो देख लो तुम एक बार
तो किस्मत हमारी
और जो ना देख पाओ
तो कोई शिकायत नहीं
किस कदर बना लूँ तुझे
शरीक-ए-ज़िंदगी मैं अपनी
थक चुकी हूँ बहुत
अकेले तन्हा चलते चलते
कि ख़ुद अपना भार
उठा सकती नहीं मैं
ग़म-ए-ज़िन्दगी मे
डूब जाने दो मुझे अब
कि शम्म-ए-ज़िन्दगी की लौ
मैं जला सकती नहीं अब...
#SwetaBarnwal
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