चाहे लाख मुसीबत आए
चहूं ओर गम की बदरी छाए
पैर के नीचे कांटे हो
या फिर चारों ओर अंधेरा हो
ये कदम कभी ना रुकेगा
महफ़िल में वीराने में
अपनों मे बेगानों मे
खुशियाँ हो या ग़म हो
आंधी आए या फ़िर तूफ़ान
ये कदम कभी ना रुकेगा
दर्द मे चाहे पलना हो
या अग्नि में मुझे जलना हो
चाहे छोड़ के देश निकलना हो
ये शीश कभी ना झुकेगा
ये कदम कभी ना रुकेगा
उजियारे में या अंधियारे में
सूखे मे या सागर में
घोर घृणा में या निश्छल प्यार मे
क्षणिक जीत या हार मे
ये कदम कभी ना रुकेगा
पुष्प और कांटो से सज्जित
सुख दुख से भरा ये जीवन
अपमनो मे सम्मानो मे
जीवन के हर राह पर
ये कदम कभी ना रुकेगा
#SwetaBarnwal
चहूं ओर गम की बदरी छाए
पैर के नीचे कांटे हो
या फिर चारों ओर अंधेरा हो
ये कदम कभी ना रुकेगा
महफ़िल में वीराने में
अपनों मे बेगानों मे
खुशियाँ हो या ग़म हो
आंधी आए या फ़िर तूफ़ान
ये कदम कभी ना रुकेगा
दर्द मे चाहे पलना हो
या अग्नि में मुझे जलना हो
चाहे छोड़ के देश निकलना हो
ये शीश कभी ना झुकेगा
ये कदम कभी ना रुकेगा
उजियारे में या अंधियारे में
सूखे मे या सागर में
घोर घृणा में या निश्छल प्यार मे
क्षणिक जीत या हार मे
ये कदम कभी ना रुकेगा
पुष्प और कांटो से सज्जित
सुख दुख से भरा ये जीवन
अपमनो मे सम्मानो मे
जीवन के हर राह पर
ये कदम कभी ना रुकेगा
#SwetaBarnwal
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