स्त्री हैं हम, हमे तुम नादान ना समझना
अब तक जो किया सो किया अब हमे लाचार ना समझना
तुम्हारी हर बात हर शर्त मंज़ूर है हमे
पर हमारे अस्तित्व के साथ कभी खिलवाड़ ना करना
पुत्र से पिता तक का सफ़र तुम्हें हमने कराया
इस बात का हमेशा तुम मान रखना
हमारे विश्वास के साथ कभी ना विश्वासघात करना
माँ, बहन, बीवी, पत्नी, पुत्री, सखी या हो कोई अनजान
हर रूप में इसका तुम सम्मान करना
तुम्हारे सृजन का कारक तुम्हारी जननी है हम
कभी हमे तुम कमजोर ना समझना
अपनी हर इक्षाओं को तुम हमपे ना थोपना
कभी पैरों तले हमारे अरमानों को ना रौंदना
जीवन है हममे भी ये बात याद रखना
ख़ुद को हमारा भगवान मत समझना
एक नारी की कोख से जन्म लेकर
किसी नारी का कभी अपमान मत करना
ज़िन्दगी है उसमे भी उसे सामान मत समझना
औरत की जिस्म का सौदा करने वाले
नपुंसक हो तुम, ख़ुद को कभी मर्द मत समझना
लूट कर जिस्म औरतों का महान तुम बन ना पाओगे
रुला कर हमे तुम भी चैन से जी ना पाओगे
समुन्दर से भी गहरी है चाहतें हमारी
अपने शौर्य बल से इसे हासिल ना कर पाओगे
जब जब चाहा तुमने हम पर अत्याचार किया
हर बार हमारे वज़ूद पर वज्र सा प्रहार किया
कभी सिता बन अग्नि में चली
तो कभी राधा बन विरह की अग्नि में जली
कभी द्रौपदी बन भरी सभा में लुटी गई
तो कभी अहिल्या बन पत्थर की मूरत बनी
कभी तीन तलाक के ज़हर से मारा हमे
कभी हलाला का ज़हर हमारी ज़िंदगी में उडे़ला
जब चाहा तुम गरज़े हम पर जब चाहा तुम बरसे
चुपचाप तुम्हारी दी हर यातना हम सहते गए
आँखें रोती रही पर लफ़्ज़ों से हम कुछ ना कहे
हम ख़ामोश सहते गए और तुम गुनाह करते गए
है गुरूर इतना ख़ुद पर तो कभी स्त्री बन कर जीना
स्त्री बन जीना यूँ पुरुष होने सा आसान ना समझना
स्त्री हैं हम, हमे तुम नादान ना समझना
अब तक जो किया सो किया अब हमे लाचार ना समझना
तुम्हारी हर बात हर शर्त मंज़ूर है हमे
पर हमारे अस्तित्व के साथ कभी खिलवाड़ ना करना ...
#SwetaBarnwal
अब तक जो किया सो किया अब हमे लाचार ना समझना
तुम्हारी हर बात हर शर्त मंज़ूर है हमे
पर हमारे अस्तित्व के साथ कभी खिलवाड़ ना करना
पुत्र से पिता तक का सफ़र तुम्हें हमने कराया
इस बात का हमेशा तुम मान रखना
हमारे विश्वास के साथ कभी ना विश्वासघात करना
माँ, बहन, बीवी, पत्नी, पुत्री, सखी या हो कोई अनजान
हर रूप में इसका तुम सम्मान करना
तुम्हारे सृजन का कारक तुम्हारी जननी है हम
कभी हमे तुम कमजोर ना समझना
अपनी हर इक्षाओं को तुम हमपे ना थोपना
कभी पैरों तले हमारे अरमानों को ना रौंदना
जीवन है हममे भी ये बात याद रखना
ख़ुद को हमारा भगवान मत समझना
एक नारी की कोख से जन्म लेकर
किसी नारी का कभी अपमान मत करना
ज़िन्दगी है उसमे भी उसे सामान मत समझना
औरत की जिस्म का सौदा करने वाले
नपुंसक हो तुम, ख़ुद को कभी मर्द मत समझना
लूट कर जिस्म औरतों का महान तुम बन ना पाओगे
रुला कर हमे तुम भी चैन से जी ना पाओगे
समुन्दर से भी गहरी है चाहतें हमारी
अपने शौर्य बल से इसे हासिल ना कर पाओगे
जब जब चाहा तुमने हम पर अत्याचार किया
हर बार हमारे वज़ूद पर वज्र सा प्रहार किया
कभी सिता बन अग्नि में चली
तो कभी राधा बन विरह की अग्नि में जली
कभी द्रौपदी बन भरी सभा में लुटी गई
तो कभी अहिल्या बन पत्थर की मूरत बनी
कभी तीन तलाक के ज़हर से मारा हमे
कभी हलाला का ज़हर हमारी ज़िंदगी में उडे़ला
जब चाहा तुम गरज़े हम पर जब चाहा तुम बरसे
चुपचाप तुम्हारी दी हर यातना हम सहते गए
आँखें रोती रही पर लफ़्ज़ों से हम कुछ ना कहे
हम ख़ामोश सहते गए और तुम गुनाह करते गए
है गुरूर इतना ख़ुद पर तो कभी स्त्री बन कर जीना
स्त्री बन जीना यूँ पुरुष होने सा आसान ना समझना
स्त्री हैं हम, हमे तुम नादान ना समझना
अब तक जो किया सो किया अब हमे लाचार ना समझना
तुम्हारी हर बात हर शर्त मंज़ूर है हमे
पर हमारे अस्तित्व के साथ कभी खिलवाड़ ना करना ...
#SwetaBarnwal
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