Thursday, 30 May 2019

वतन पे कुर्बान होने की आरज़ू...

इस देश की मिट्टी से मोहब्बत हम भी करते हैं
कुछ कर गुज़रने की हसरत हम भी रखते हैं
पड़े जो जरूरत मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते हैं
सर दुश्मन के कलम कर दे वो ताकत हम भी रखते हैं
आए जो मुसीबत तो हंस हंस के सहेंगे हम
जज़्बा-ए-जुनून इस दिल में हम भी रखते हैं
ठोकरों में अपने गर्दिश-ए-जमाने को हम भी रखते हैं
अपने वतन की आज़ादी की हसरत हम भी रखते हैं
नज़रें उठी जो किसी की हमारे हिंद पे कभी
उन नज़रों को फोड़ने की चाहत हम भी रखते हैं
दुश्मन हो कोई चाहे सरहद के इस पार या उस पार
उनसे नफ़रत का सैलाब अपने दिल में हम भी रखते हैं
बांध सर पे कफ़न अपने हम सुबह-ओ-शाम चलते हैं
कि वतन पे कुर्बान होने की आरज़ू हम भी रखते हैं...

#SwetaBarnwal 

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