Wednesday, 29 May 2019

पापा...

यूँ तो ज़िन्दगी ने हमें कई रिश्ते हैं दिए
कुछ साथ चले तो कुछ पल भर में ही छूट गए
कुछ बनते बनते टूट गए कुछ बेवजह ही रूठ गए
पर जो रिश्ता आजीवन साथ रहा वो थे पापा

बातों मे सख्त पर दिल के बड़े ही नर्म होते हैं
हर मुसीबत में अपने बच्चो का ये साथ निभाते हैं
यूँ तो हर कोई अपने कही बात से मुकर जाता है
पर जो बिन कहे सारे अरमां पूरे कर जाते वो थे पापा

जो हर मुश्किल राह में अपने बच्चों का हौसला बढ़ाते हैं
हर पग पर दुनियादारी की समझ कराते हैं
जो ख़ुद ना कभी झुकते हैं और ना बच्चों को रुकने देते हैं
जो ख़ुद जल कर मार्ग प्रशस्त करते हैं वो थे पापा

कम आमदनी मे भी हमारी हर ख्वाहिश करते हैं पूरी
हर ख्वाब हमारे जादूगर के जैसे चुटकी में वो कर जाते हैं पूरे
ना कभी दिन देखा उन्होंने और ना ही देखी कभी रात
हमारे सपनों के लिए ख़ुद को भी नीलाम किया वो थे पापा

दुख की कड़ी धूप हर बार ख़ुद अकेले ही झेली है
सुख की ठंढ़ी छाँव में सदा हमे है सुलाया
अपनी सख्त आवाज के पीछे अपना प्यार छुपाते हैं
हमारी जरूरतों के लिए ख़ुद को बेच देते हैं वो थे पापा...

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