Thursday, 30 May 2019

ये कदम कभी ना रुकेगा...

चाहे लाख मुसीबत आए
चहूं ओर गम की बदरी छाए
पैर के नीचे कांटे हो
या फिर चारों ओर अंधेरा हो
ये कदम कभी ना रुकेगा

महफ़िल में वीराने में
अपनों मे बेगानों मे
खुशियाँ हो या ग़म हो
आंधी आए या फ़िर तूफ़ान
ये कदम कभी ना रुकेगा

दर्द मे चाहे पलना हो
या अग्नि में मुझे जलना हो
चाहे छोड़ के देश निकलना हो
ये शीश कभी ना झुकेगा
ये कदम कभी ना रुकेगा

उजियारे में या अंधियारे में
सूखे मे या सागर में
घोर घृणा में या निश्छल प्यार मे
क्षणिक जीत या हार मे
ये कदम कभी ना रुकेगा

पुष्प और कांटो से सज्जित
सुख दुख से भरा ये जीवन
अपमनो मे सम्मानो मे
जीवन के हर राह पर
ये कदम कभी ना रुकेगा

#SwetaBarnwal

वतन पे कुर्बान होने की आरज़ू...

इस देश की मिट्टी से मोहब्बत हम भी करते हैं
कुछ कर गुज़रने की हसरत हम भी रखते हैं
पड़े जो जरूरत मर मिटने की हिम्मत हम भी रखते हैं
सर दुश्मन के कलम कर दे वो ताकत हम भी रखते हैं
आए जो मुसीबत तो हंस हंस के सहेंगे हम
जज़्बा-ए-जुनून इस दिल में हम भी रखते हैं
ठोकरों में अपने गर्दिश-ए-जमाने को हम भी रखते हैं
अपने वतन की आज़ादी की हसरत हम भी रखते हैं
नज़रें उठी जो किसी की हमारे हिंद पे कभी
उन नज़रों को फोड़ने की चाहत हम भी रखते हैं
दुश्मन हो कोई चाहे सरहद के इस पार या उस पार
उनसे नफ़रत का सैलाब अपने दिल में हम भी रखते हैं
बांध सर पे कफ़न अपने हम सुबह-ओ-शाम चलते हैं
कि वतन पे कुर्बान होने की आरज़ू हम भी रखते हैं...

#SwetaBarnwal 

ख्वाबों की दुनिया...

तेरे लिए सपनों की एक हसीं दुनिया बनाई है मैंने
दो पल के लिए ही मेरी इस दुनिया में आओ तो तुम
ना जाने क्यूँ अब तक दूर खड़े हो मुझसे
छोड़ कर सबकुछ मेरी बाहों में समा जाओ तो तुम
मैं तो हर पल तेरे ही ख्यालों में खोई रहती हूँ
कुछ पल के लिए मेरे ख्यालों में खो जाओ तो तुम
मैंने तो अपना सर्वस्व मान लिया है तुझको
बस एक बार मेरे हो जाओ तो तुम
शुरु करते हैं मोहब्बत की एक नई दास्तां
कुछ पल का ही सही साथ निभा जाओ तो तुम
जिस कदर पहली बार हाथ थामा था मेरा
एक बार फिर से मेरी ओर हाथ बढ़ाओ तो तुम
पहली मुलाकात में जैसे इशारों में बात हुई थी
फ़िर उसी तरह हमसे नज़रें मिलाओ तो तुम
जिस जगह हम पहली बार मिले थे
उसी जगह एक बार फिर हमसे मिलने आओ तो तुम
मेरा वज़ूद बस तुझमें सिमट कर रह गया है
एक बार ख़ुद आकर मुझमे समाओ तो तुम
हर जतन कर लिया हमने इस दूरी को मिटाने की
बस एक कदम मेरी ओर बढ़ाओ तो तुम
ख़ुद की नज़र से रोज़ देखती हूँ ख़ुद को
एक बार अपनी नज़र से मुझको देख जाओ तो तुम
जानते हैं ये जमाना है प्यार का दुश्मन
बस एक बार जमाने को भूल जाओ तो तुम
जो कभी किसी ने भी ना किया हो
इश्क़ मे एक बार कुछ ऐसा कर जाओ तो तुम...


#SwetaBarnwal 

Wednesday, 29 May 2019

जुदाई...

यूँ अचानक तेरे चले जाने से
रंग जीवन का जैसे यूँ उड़ गया
बह गए आँख से सारे सपने
खो गई जहाँ की सारी ख़ुशी

रह गया अपना ये खोखला तन
उड़ गया कहीं मेरा मन
रूठ कर मुझसे मेरा वो अपना
खो गया ना जाने कैसे कहाँ

दिन के उजाले में भी जैसे
घनघोर अंधियारा छा गया
ऐ ज़िन्दगी अब तु ही बता
ये क्या से क्या हो गया

है ये कोई पल दो पल की सज़ा
या जीवन मेरा मुरझा सा गया
आख़िर क्यूँ मोहब्बत के नसीब मे
होती है जुदाई की ऐसी सज़ा

#SwetaBarnwal




माँ की दुआ...

यकीनन मेरे सर पे मेरी माँ की दुआओं का साया है
जो किस्मत आज मुझे इस मुकाम पर ले कर आया है

लौट आया हूँ आज फ़िर से तेरी आगोश में मैं माँ
इस ज़ालिम दुनिया ने मुझे जी भर कर सताया है

तेरी कुर्बानियों की अब क्या मिसाल दे कोई
मुसीबत आई जो मुझपर तूने ख़ुद को जलाया है

मेरी खुशहाली के लिए कितने सज़दे किए हैं तूने
हर चौखट पर तूने मेरे कामयाबी के लिए दिए जलाए हैं

उठे जो मेरे लिए दोनों हाथ दुआओं मे तेरे
ख़ुदा ने भी तेरी ज़िद के आगे अपना सर झुकाया है

समेट ले एक बार फिर से अपने आँचल में मुझे
तेरे ही चरणों में मैंने मेरा स्वर्ग पाया है माँ...

#SwetaBarnwal


कोई तो होगा...!

कोई तो ऐसी जगह होगी इस धरा पर
जहाँ इंसानियत होती होगी पहले दरज़े पर

कोई तो होगा ऐसा जो ईन्सान से प्यार करता होगा
करता होगा ख़ुदा की बन्दगी उसके कहर से डरता होगा

कोई तो होगा ऐसा जो भाईचारे का व्यापार करता होगा
बुझा कर आग नफ़रत की दिलों में प्यार भरता होगा

कोई तो होगा ऐसा जो छुपा कर अश्क आँखों में
खुशी से गले लगाकर सबको बीमार करता होगा

इस रंग बदलती दुनिया में कोई तो होगा ऐसा जो
मिटा कर भेद रंगों का सबको एक रंग में रंगता होगा 

ज़िन्दगी के बचे लम्हें बस इस आस में जिए जा रहा हूँ 
कोई तो होगा जो जमीं को सरहदों से आज़ाद करता होगा... 

#SwetaBarnwal 

ऐ प्रभु...!

ऐ प्रभु...! बस इतनी सी मेरी अरज़ सुन ले
तुझे भूल कर ना जिऊं कभी इतनी सी मेहर कर दे

इतनी ख़ुशी भी ना देना कि किसी के ग़म पर हंसी आ जाए
इतने ग़म भी ना देना कि हम टूट बिखर जाएं
ना देना इतनी ऊँचाई कि जमी पर पांव ना थमे
ना इतना नीचे गिराना कि ख़ुद से भी ना नज़रें मिले
ऐ प्रभु...!

नहीं चाहिए ऐसा ज्ञान मुझको जो अभिमान हो जाए
ना इतना अज्ञानी बनाना जो तुझसे भी अनजान कर जाए
नहीं चाहिए ऐसी शक्ति जिसका निर्बल पर उपयोग करूं
नहीं चाहिए ऐसी चतुराई जो सबको छलने ही लगूँ
ऐ प्रभु...!

ना देना इतनी प्रसिद्धि प्रभु अपने भी पराए लगने लगे
भला ऐसी माया किस काम की जो बुद्धि भ्रष्ट करने लगे
नही चाहिए ऐसा जीवन जहां मित्र भी शत्रु बन बैठे
जहाँ जीवन लगे भारी और मौत अट्टहास करने लगे
ऐ प्रभु...!

#SwetaBarnwal

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...