Thursday, 23 November 2017

तरसेगा जिस रोज तेरा दिल हमसे मुलाकात को,
हम दौड़े आएंगे तुझसे  मिलने ख्वाबों में उसी रात को... 

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...