ये नारी है कोई खिलौना नहीं,
मर्दों का ये कोई बिछौना नहीं.. मन बहलाने का कोई साधन नहीं, घर सजाने का ये कोई सामान नहीं... इज़्ज़त उसे भी है प्यारी, सम्मान की है वो भी अधिकारी, उसकी भावनाओं से खेलो मत, उसके सपनों को रौंदो मत, जननी है वो इस सृष्टि की, बनो न कारण उसके आंखों के वृष्टि की. मौत के मुंह से जीवन को लाती है, तब जाकर तुझे पितृ सुख दे पाती है...
#Sweta_Barnwal
मर्दों का ये कोई बिछौना नहीं.. मन बहलाने का कोई साधन नहीं, घर सजाने का ये कोई सामान नहीं... इज़्ज़त उसे भी है प्यारी, सम्मान की है वो भी अधिकारी, उसकी भावनाओं से खेलो मत, उसके सपनों को रौंदो मत, जननी है वो इस सृष्टि की, बनो न कारण उसके आंखों के वृष्टि की. मौत के मुंह से जीवन को लाती है, तब जाकर तुझे पितृ सुख दे पाती है...
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