Tuesday, 21 November 2017

उन्मुक्त ज़िन्दगी की ख्वाहिशें



मकसद से तो हर रोज़ जीते हो,
   कभी बेमकसद ज़िन्दगी जी लिया करो यारों |
पैसे कमाने की ख्वाहिस तो हर रोज़ होती है,
   कभी रिश्ते कमाने की ख्वाहिस भी रख लिया करो यारों|
नाम कमाने तो हर रोज़ निकलते हो घर से,
   कभी गुमनाम हो कर भी घर से निकल लिया करो यारों|
आँखों में सपने लिए हर रोज सोते हो,
  कभी सुनी आँखें भी सो लिया करो यारों|
वजह से तो हर कोई हसता है,
   कभी बेवजह भी मुस्कुरा लिया करो यारों|
बचपन तो आँखों से छूट ही गया,
   बचपना तो न यूँ छोड़ो यारों|
जरुरत पड़ने पे लोगो की याद आ ही जाती है,
   कभी बेमतलब भी अपनों को याद कर लिया करो यारों|
ये ज़िन्दगी यूँ तो कट ही जायेगी,
    बस ज़िन्दगी को एक बार ज़िन्दगी की तरह जी लिया करो यारों|

#SwetaBarnwal 

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