ख्वाबों मे खोए से हो,हरबात तेरी सपनीली है।ऐतबार करो तो अपने हैंं वरना सपने तो सपने हैं।
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ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
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ख्वाबों मे खोए से हो,हरबात तेरी सपनीली है।
ऐतबार करो तो अपने हैंं वरना सपने तो सपने हैं।
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