Friday, 24 November 2017

Tu raat ka musafir h,
 tera aitbar kaisa.
Jo ankh khulte hi kho jaye
usse pyar kaisa...

#SwetaBarnwal 

1 comment:

Unknown said...

ख्वाबों मे खोए से हो,हरबात तेरी सपनीली है।
ऐतबार करो तो अपने हैंं वरना सपने तो सपने हैं।

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...