Monday, 20 November 2017

Kah do jakar हवा को, yun  sarsaraya na करे,
Jo मुमकिन nhi khuda se bhi, वो farmaya na kare...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...