Wednesday, 22 November 2017

लिख दूँ गर दास्तां-ए-दिल की,
तुम लफ़्ज़ों का दिल नहीं पढ़ पाओगे...।

#SwetaBarnwal

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ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...