Tuesday, 21 November 2017

कौन कहता है कि इश्क़ की सरहद नहीं होती,
बस एक बार अपनी हद से निकल कर तो देख...

#SwetaBarnwal 

1 comment:

Sweta Kumari Barnwal said...

Had kab sarhad me badal jati h, kisne jana h...
Humne to dilon ko bhi janziron me bandhte dekha h...

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...