कोमल है कमज़ोर नहीं तु,
निर्मल है मजबूर नहीं तु |तु शक्ति स्वरूपा नारी है,
मौत भी तुझसे हारी है |
जग को जीवन देने वाली,
तु प्रेम सुधा रस बरसाने वाली |
तूने अपनी साँसे वारी है,
तुझसे ये जग की फुलवारी है |
नारी तु नारायणी है,
तीनो लोको की तु स्वामिनी है |
हर रूप में तु वंदनीय है,
मातृ रूप तेरा अभिनन्दिनीय है |
<SwetaPrakash>
#SwetaBarnwal
2 comments:
Superb...
Nice poem.
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