Super se v upar......nice!!!
” ना जाने वो कौन सी डोर है,जो तुझ संग जुड़ी है,दूर जायें तो टूटने का डर है,पास आयें तो उलझने का डर है ”वाह बहुत खूब
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ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है... किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो, कोई लाखों की किस्मत का माल...
2 comments:
Super se v upar......nice!!!
” ना जाने वो कौन सी डोर है,
जो तुझ संग जुड़ी है,
दूर जायें तो टूटने का डर है,
पास आयें तो उलझने का डर है ”
वाह बहुत खूब
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