Tuesday, 21 November 2017

ना जाने क्या-क्या देखा...!

पल-पल बदलते लोग देखे,
अपनों की महफिल में बेगाने देखे,
सुख में जो कल तक साथ थे,
दुःख में उन्हे मुह फेरते देखे...।

हंसते हुए चेहरे के पीछे,
रोते हुए दिलों को देखा,
गैरों की तुम बात ना पूछो,
अपनो की हाथों मे खंजर देखा..।

रोती हुई आंखें देखी,
हंसता हुआ ज़माना देखा,
हर आदमी को यहां मैने,
खुद से ही बेज़ार देखा..।

रंग बदलती दुनिया देखी,
चेहरों के पीछे चेहरा देखा,
टूटे सपनों के सौगात देखे,
कभी हसरतों के बरसात देखे..।

हर इंसान को हमने यहां दर्द में देखा,
पर फिर भी सबको मुस्कुराते देखा,
ऐ ज़िंदगी..! इस छोटी सी ज़िंदगी में,
"श्वेता" की आंखों ने "न जाने क्या-क्या देखा"..।

#SwetaBarnwal 

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...