Wednesday, 3 January 2018

मेरी बेटी "आराध्या"

मेरी बेटी "आराध्या", थोड़ी सी बड़ी हो गई है, 
कुछ ज़िद्दी कुछ नकचढ़ी हो गई है,

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

अब अपनी हर बात वो मनवाने लगी है,
हमको ही अब वो समझाने लगी है,
हर दिन नई-नई फरमाइशें होती है उसकी,
जैसे फरमाइशों की वो झड़ी हो गई है...

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

जब वो हंसती है तो मन को मोह लेती है,
घर के कोने-कोने में उसी की महक होती है,
कई बार उसके अजीब से सवाल भी होते हैं,
जैसे सवालों की वो लड़ी हो गई है...

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

अगर डांटती हूँ तो आँखें दिखाती है,
खुद ही गुस्सा कर वो रूठ जाती है,
घर के किसी कोने में कहीं छुप जाती है,
गुस्से में कभी पटाखा कभी फूलझड़ी हो गई है...

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

घर आते ही दिल उसी को पुकारता है,
सपने सारे अब उसी के संवारता है,
दुनिया मे उसको अलग पहचान दिलवानी है,
मेरे कदम से कदम मिला वो खड़ी हो गई है...

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

मेरा आज मेरा सुनहरा भविष्य है वो 
मेरे अधूरे जीवन का पूरा होता ख्वाब है वो 
अपने नन्हे हाथों से मेरे आँसुओं को पीछे 
मेरे हर दर्द की जैसे वो कोई दवा हो गई है... 

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

हासिल हो दुनिया में वो मकाम उसे, 
बेटी है वो मेरी इसका हो अभिमान मुझे, 
उसकी एक मुस्कुराहट मे सारे गम भूलाऊँ,
जैसे वो #श्वेता के लिए जादु की छड़ी हो गई है...

मेरी बेटी थोड़ी सी बड़ी हो गई है...

#SwetaPrakash


5 comments:

Unknown said...

सुन्दर.. भाव !👌

Unknown said...

Just wow.

Praveen kumar said...

बेटी आराध्या की तरफ से मेरा कमेंट

हमे क्या पड़ी है कि हम सब समझ जाएं
हमारा तो हक है कि हम रूठ जाएं

Unknown said...

Fantastic mam

Unknown said...

Wow nice line

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