Tuesday, 9 January 2018

मैं हूँ सिपाही

मैं हूँ सिपाही,
लड़ता रहता हूँ,
बिना थके
बिना रुके,
कभी देश के अंदर
तो कभी सरहद पे,

मैं हूँ सिपाही
लड़ता रहता हूँ
कभी हालातों से,
कभी विषम परिस्थितियों से,
कभी दुश्मनों से
कभी देश में
छुपे गद्दारों से,

मैं हूँ सिपाही,
लड़ता रहता हूँ
डर नहीं मुझे
मौत का,
कफ़न बाँध
निकला हूँ घर से,
डर है मुझे
अपनों के बीच
छुपे भेड़िये से,
करते हैं जो
पीठ पे वार,

मैं हूँ सिपाही,
लड़ता रहता हूँ,
सरहद हो
या देश की हद हो,
हमारे लिए
ना कोई छुट्टी,
ना त्योहार है,
बस सबकी
सुरक्षा और खुशी
का ख्याल रखता हूँ,

मैं हूँ सिपाही
लड़ता रहता हूँ,
जान पे खेलता हूँ
सबकी रक्षा करता हूँ,
परिवार से पहले,
देश की सोचता हूँ,
हर कुर्बानी देता हूँ,
अपनों को रोता छोड़ जाता हूँ

मैं हूँ सिपाही,
लड़ता रहता हूँ,
आज सबसे सवाल
पूछता हूँ,
सियासत के नवाबों से,
जवाब मांगता हूँ,
हर एक ज्यादती का
हिसाब चाहता हूँ,

मैं हूँ सिपाही,
लड़ता रहता हूँ,
बल्लों से खेलने वाले को
करोड़ों
और जान से खेलने वालों को
भीख
क्या सिपाही से ज्यादा
देश को खिलाड़ी से प्यार है...

मैं हूँ सिपाही,
लड़ता रहता हूँ
क्यों नहीं है मंत्री के बच्चे 
हमारे साथ,
क्या उनमें छुपी है 
कोई विशेष बात, 
या वो सच्चे देशभक्त नहीं होते, 
और यदि ऐसा है कुछ 
तो बंद करो ये नाटक 
मुझे महान बताने का,
मैं जानता हूं,
ये सब साज़िश है 
खुद को बचाने का,
और मुझे वक्त से पहले 
मारने  का,

मैं हूँ सिपाही 
लड़ता रहता हूँ, 
मन मे छुपे हैं 
मेरे कई सवाल, 
पर फिर भी 
मैं मौन हूँ, 
क्यूंकि... 
मैं भी इस देश का 
एक आम नागरिक हूँ.

मैं हूँ सिपाही
लड़ता रहता हूँ,
कभी खुद से,
कभी खुद की खुद्दारी से,
सोचता रहता हूँ 
कब सब बदलेगा...! 
मैं हूँ सिपाही 
आज ख़ुद अपनी 
व्यथा कहने बैठा हूँ...। 

#SwetaBarnwal 



5 comments:

Sant Raj Khandodiya said...

Very very nice n realistic... hats off to your passion...

Unknown said...

Wow very nice line

Unknown said...

Bhut khub.... Jai jawan Jai kisan

Unknown said...

Bhut khub.... Jai jawan Jai kisan

Unknown said...

Very nice

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...