बित गए दिन बचपन और जवानी के,
ख़तम हुआ किस्सा मेहनत और कुर्बानी के,
छोड़ गए अब सारे अपने टूट गए सारे सपने,
अब तो अपनी काया भी साथ छोड़ रही है,
जिस बेटे के लिए मांगी थी लाखों मन्नतें,
टेका था हर मंदिर पर माथा जिसके लिए,
था जिसपे अभिमान, रखेगा वो मेरा मान,
आज तार तार कर गया वही जिस्म-ओ-जान,
बुढ़ापे ने ये क्या दिन दिखलाया है,
कल तक जो अपना था आज वो ही पराया है,
टिकी रहती है हर वक़्त हर पल वो दो आँखें
टकटकी लगाए देखती है करती है इंतज़ार तेरा,
ना जाने कितनी रातें जागी थी कितने ख्वाब सजाए,
तेरे पहले कदम पे जिसने तुझको अपना हाथ दिया,
हर घड़ी हर मोड़ पर जो बना तेरा सहारा,
आज उनके आख़िरी पल में कहाँ खो गया वो दुलारा,
तरस रही है वो दो आँखें उनकी है इंतज़ार उनको,
अपने लाडले का जिसके लिए दी उन्होनें हर कुर्बानी...
#SwetaBarnwal

ख़तम हुआ किस्सा मेहनत और कुर्बानी के,
छोड़ गए अब सारे अपने टूट गए सारे सपने,
अब तो अपनी काया भी साथ छोड़ रही है,
जिस बेटे के लिए मांगी थी लाखों मन्नतें,
टेका था हर मंदिर पर माथा जिसके लिए,
था जिसपे अभिमान, रखेगा वो मेरा मान,
आज तार तार कर गया वही जिस्म-ओ-जान,
बुढ़ापे ने ये क्या दिन दिखलाया है,
कल तक जो अपना था आज वो ही पराया है,
टिकी रहती है हर वक़्त हर पल वो दो आँखें
टकटकी लगाए देखती है करती है इंतज़ार तेरा,
ना जाने कितनी रातें जागी थी कितने ख्वाब सजाए,
तेरे पहले कदम पे जिसने तुझको अपना हाथ दिया,
हर घड़ी हर मोड़ पर जो बना तेरा सहारा,
आज उनके आख़िरी पल में कहाँ खो गया वो दुलारा,
तरस रही है वो दो आँखें उनकी है इंतज़ार उनको,
अपने लाडले का जिसके लिए दी उन्होनें हर कुर्बानी...
#SwetaBarnwal

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