सुनो...! कुछ कहना है तुमसे,
कुछ कही तो कुछ अनकही,
एक ख़ामोश सी मोहब्बत है
तेरे मेरे बीच में,
बहुत कुछ कहना है तुमसे
पर है वक़्त की कमी,
ज़माने की नज़र में
अजनबी हैं हम,
मगर दरमियाँ हैं अपने
अनजानी सी मोहब्बत,
यूँ तो तुम मुझसे
दूर बहुत हो,
फ़िर भी तेरे लिए इन आँखों में
ख्वाब कई हैं,
जानती हूँ #श्वेता कि
तुम मेरा मुकद्दर नहीं,
फ़िर भी तेरे होने का
दिल में अहसास बहुत है...
#SwetaBarnwal
कुछ कही तो कुछ अनकही,
एक ख़ामोश सी मोहब्बत है
तेरे मेरे बीच में,
बहुत कुछ कहना है तुमसे
पर है वक़्त की कमी,
ज़माने की नज़र में
अजनबी हैं हम,
मगर दरमियाँ हैं अपने
अनजानी सी मोहब्बत,
यूँ तो तुम मुझसे
दूर बहुत हो,
फ़िर भी तेरे लिए इन आँखों में
ख्वाब कई हैं,
जानती हूँ #श्वेता कि
तुम मेरा मुकद्दर नहीं,
फ़िर भी तेरे होने का
दिल में अहसास बहुत है...
#SwetaBarnwal
No comments:
Post a Comment