Tuesday, 12 June 2018

काश...!

काश...! 
समझ पाते तुम 
मेरे अनकहे
जज़्बातों को,
तो ये अहसास 
मोहताज़ ना होते 
मेरे शब्दों के, 
जरूरत ना पड़ती 
कागज़, कलम 
और दवात की, 
जो दिखा पाती मैं 
अपने दिल के दर्द 
इन आँखों से, 
काश...! 

#SwetaBarnwal 

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