Tuesday, 19 June 2018

लहरों से खेलना है सागर का शौख,
लगती है कितनी चोट ये किनारों से पूछ...

#SwetaBarnwal 

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...