Monday, 11 June 2018

हो गई गर खता
तो कोई सज़ा दे दो,
यूँ ख़ामोश रह कर
गहरे जख्म ना दे दो...

#SwetaBarnwal

No comments:

ऐ विधाता...!

 ऐ विधाता...! ना जाने तू कैसे खेल खिलाता है...  किसी पे अपना सारा प्यार लुटाते हो, और किसी को जीवन भर तरसाते हो,  कोई लाखों की किस्मत का माल...